Bangladesh Mob Lynching: बांग्लादेश में हिंदू युवक की बर्बर हत्या पर भड़कीं प्रियंका गांधी, मोदी सरकार से की यह बड़ी मांग

बांग्लादेश में ईशनिंदा के आरोप में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या (Mob Lynching) कर दी गई। प्रियंका गांधी ने इसे 'बेहद विचलित करने वाला' बताया और भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। जानें पूरी घटना और शरीफ उस्मान हાદी की मौत से जुड़ा कनेक्शन।

Dec 20, 2025 - 18:56
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Bangladesh Mob Lynching: बांग्लादेश में हिंदू युवक की बर्बर हत्या पर भड़कीं प्रियंका गांधी, मोदी सरकार से की यह बड़ी मांग
बांग्लादेश में हिंदू युवक की 'मॉब लिंचिंग' पर प्रियंका गांधी ने जताई गहरी चिंता, भारत सरकार से की सुरक्षा की मांग

नई दिल्ली/ढाका: पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश एक बार फिर हिंसा और अराजकता की आग में जल रहा है। राजनीतिक अस्थिरता के बीच वहां अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। हाल ही में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक हिंदू युवक की भीड़ ने ईशनिंदा (Blasphemy) के आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी और उसके शव को जला दिया।

इस बर्बर घटना ने भारत में भी चिंता की लहर पैदा कर दी है। कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने इस घटना को "अत्यंत विचलित करने वाला" बताया है और केंद्र की मोदी सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

आइए विस्तार से जानते हैं कि बांग्लादेश में क्या हुआ, यह हिंसा क्यों भड़की और इस पर भारतीय नेताओं की क्या प्रतिक्रिया है।

क्या है पूरी घटना? (The Incident)

घटना बांग्लादेश के मैमनसिंह (Mymensingh) जिले के भालुका (Bhaluka) इलाके की है। पुलिस और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मारे गए युवक की पहचान 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास (Dipu Chandra Das) के रूप में हुई है, जो एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था।

गुरुवार (18 दिसंबर) की रात को एक हिंसक भीड़ ने दीपू को घेर लिया। उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणी की है।

  • बर्बरता की हदें पार: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ ने दीपू को पुलिस कस्टडी से छीनने की कोशिश की। जब पुलिस उसे थाने ले जा रही थी, तब हजारों की संख्या में उपद्रवियों ने थाने को घेर लिया।

  • शव को जलाया: भीड़ ने दीपू को बाहर खींच निकाला और लाठी-डंडों से तब तक पीटा जब तक उसकी जान नहीं निकल गई। हैवानियत यहीं नहीं रुकी; हत्या के बाद भीड़ ने उसके शव को एक पेड़ से लटका दिया और आग लगा दी।

प्रियंका गांधी का कड़ा बयान

इस अमानवीय घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक पोस्ट लिखा। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में धर्म या पहचान के आधार पर हिंसा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

प्रियंका गांधी ने लिखा:

"बांग्लादेश में एक हिंदू युवक, दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा की गई बर्बर हत्या की खबर अत्यंत विचलित करने वाली (Extremely Disturbing) है। किसी भी सभ्य समाज में धर्म, जाति या पहचान के आधार पर भेदभाव, हिंसा और हत्या मानवता के खिलाफ अपराध है।"

उन्होंने आगे भारत सरकार से अपील करते हुए कहा:

"भारत सरकार को पड़ोसी देश में हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्ध अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा का कड़ा संज्ञान लेना चाहिए और बांग्लादेश सरकार के समक्ष उनकी सुरक्षा का मुद्दा मजबूती से उठाना चाहिए।"

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी इस घटना की निंदा करते हुए इसे "असहनीय त्रासदी" बताया और बांग्लादेशी प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

शरीफ उस्मान हાદी की मौत और हिंसा का कनेक्शन

आपके द्वारा शेयर की गई खबर में शरीफ उस्मान हાદी (Sharif Osman Hadi) का नाम भी प्रमुखता से लिया गया है। यह समझना जरूरी है कि इन दोनों घटनाओं का आपस में क्या संबंध है।

  • कौन थे शरीफ उस्मान हાદी? हાદी बांग्लादेश के एक कट्टरपंथी छात्र नेता और 'इंकलाब मंच' के प्रवक्ता थे। वे भारत विरोधी (Anti-India) बयानों के लिए जाने जाते थे और शेख हसीना सरकार को गिराने वाले आंदोलन में सक्रिय थे।

  • हिंसा क्यों भड़की? पिछले हफ्ते ढाका में हાદी को गोली मार दी गई थी, जिसके बाद इलाज के दौरान सिंगापुर में उनकी मौत हो गई। उनकी मौत की खबर आते ही उनके समर्थकों ने बांग्लादेश में कोहराम मचा दिया।

  • अल्पसंख्यकों पर हमला: हાદी के समर्थकों ने आरोप लगाया कि उनकी हत्या के पीछे भारत या अवामी लीग का हाथ है। इसके बाद उन्होंने ढाका में मीडिया ऑफिस जलाए और कई जगहों पर हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। दीपू चंद्र दास की लिंचिंग भी इसी अराजक माहौल के बीच हुई।

बांग्लादेश सरकार की सफाई

अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ता देख बांग्लादेश की अंतरिम सरकार (Interim Government), जिसका नेतृत्व मुहम्मद यूनुस कर रहे हैं, ने इस घटना की निंदा की है। सरकार ने एक बयान जारी कर कहा: "हम मैमनसिंह में हिंदू व्यक्ति की लिंचिंग की कड़ी निंदा करते हैं। नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। इस जघन्य अपराध के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।"

हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद से वहां कानून-व्यवस्था चरमरा गई है और कट्टरपंथी तत्व हावी हो गए हैं।

भारत के लिए चिंता का विषय

यह घटना भारत के लिए कूटनीतिक और भावनात्मक रूप से चिंताजनक है।

  1. शरणार्थी संकट: अगर हिंसा नहीं रुकी, तो बांग्लादेश से बड़ी संख्या में हिंदू शरणार्थी भारत की ओर पलायन कर सकते हैं।

  2. सुरक्षा: भारत विरोधी भावनाएं (Anti-India Sentiments) वहां चरम पर हैं, जिससे भारतीय दूतावास और वहां रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा खतरे में है।

  3. सांस्कृतिक संबंध: बांग्लादेश में इस्कॉन (ISKCON) और अन्य हिंदू संगठनों पर लगातार हो रहे हमले भारत की सांस्कृतिक विरासत पर चोट हैं।

निष्कर्ष

दीपू चंद्र दास की हत्या सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि बांग्लादेश में घटते सहिष्णुता के स्तर का प्रमाण है। प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं द्वारा उठाया गया यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजना चाहिए। अब यह देखना होगा कि भारत सरकार इस पर क्या कूटनीतिक कदम उठाती है, ताकि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों का जीवन सुरक्षित रह सके।