होर्मुज पर अमेरिका संग हमले की योजना बना रहा UK? स्टार्मर ने दिए संकेत
इस्लामाबाद वार्ता से पहले डोनाल्ड ट्रंप और कीर स्टार्मर की मुलाकात ने बढ़ाई हलचल। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षा, सैन्य विकल्प और कूटनीति पर चर्चा से उठे सवाल, क्या ब्रिटेन अमेरिका संग हमले की तैयारी में है?
हाल ही में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मचा दी है। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली महत्वपूर्ण वार्ता से ठीक पहले, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इंग्लैंड के प्रधानमंत्री कीर-स्टार्मर के बीच हुई बातचीत ने कई कयासों को जन्म दिया है। यह बैठक मुख्यतः होर्मुज स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, सैन्य विकल्पों और कूटनीति पर केंद्रित थी, जिसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या ब्रिटेन अमेरिका के साथ मिलकर होर्मुज पर किसी हमले की योजना बना रहा है?
सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं ने खाड़ी क्षेत्र की संवेदनशील स्थिति और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए होर्मुज की महत्ता पर गहन चर्चा की। इस दौरान, जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संभावित "सैन्य विकल्पों" पर भी बात हुई, जिसने कई भू-राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। हालांकि कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की बात भी हुई, लेकिन सैन्य विकल्पों पर चर्चा ने ब्रिटेन की संभावित भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कीर स्टार्मर ने अपनी टिप्पणी से इन अटकलों को और हवा दे दी है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर द्वारा सैन्य विकल्पों पर चर्चा में शामिल होना यह संकेत देता है कि लंदन, वाशिंगटन के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई में अपनी भूमिका निभा सकता है। विशेषकर ऐसे समय में जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव चरम पर है, यह चर्चा ब्रिटेन की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हो सकती है। क्या ब्रिटेन, अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ किसी बड़े कदम की योजना बना रहा है, यह प्रश्न अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंज रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जिससे दुनिया के कुल समुद्री तेल का लगभग एक तिहाई हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि या अस्थिरता का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसलिए, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे प्रमुख शक्तियों द्वारा यहां सैन्य विकल्पों पर चर्चा को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता के नतीजे और कीर स्टार्मर द्वारा दिए गए ये संकेत आगामी समय में मध्य पूर्व की भू-राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। फिलहाल, विश्व समुदाय की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति सफल होगी, या फिर होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर सैन्य टकराव का अखाड़ा बनेगा, जिसमें ब्रिटेन भी अमेरिका का साथ देता नजर आ सकता है।