AI Layoffs 2025: खतरे में नौकरियां! Amazon-Microsoft समेत इन 4 बड़ी कंपनियों ने AI के नाम पर की 50,000 कर्मचारियों की छुट्टी
2025 में AI के कारण 50,000 से अधिक टेक नौकरियां खत्म हो गई हैं। जानें कैसे Amazon, Microsoft, IBM और Salesforce ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हवाला देकर बड़ी छंटनी की। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
नई दिल्ली: जिस बात का डर पिछले दो सालों से सता रहा था, 2025 में वह हकीकत बनकर सामने आ गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ कोडिंग में मदद करने वाला टूल नहीं रहा, बल्कि यह सीधे तौर पर नौकरियों को निगलने लगा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में सिर्फ अमेरिका में ही 50,000 से अधिक टेक कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है, और इसके पीछे का स्पष्ट कारण 'AI' बताया गया है।
चैलेंजर, ग्रे एंड क्रिसमस (Challenger, Gray & Christmas) की डेटा रिपोर्ट बताती है कि टेक कंपनियों ने इस साल कुल 54,883 नौकरियों में कटौती के लिए सीधे तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जिम्मेदार ठहराया है। यह आंकड़ा इस बात का सबूत है कि कंपनियां अब 'कॉस्ट-कटिंग' के लिए AI का इस्तेमाल एक हथियार की तरह कर रही हैं।
यहाँ उन 4 बड़ी टेक कंपनियों का विवरण दिया गया है जिन्होंने अपनी छंटनी (Layoffs) की घोषणाओं में खुलकर AI का नाम लिया और बताया कि कैसे वे इंसानों की जगह मशीनों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
1. अमेज़न (Amazon): "AI इंटरनेट से भी बड़ा बदलाव है"
ई-कॉमर्स दिग्गज अमेज़न ने इस साल अपने कॉर्पोरेट वर्कफोर्स में बड़ी कटौती करते हुए लगभग 14,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया। जब कंपनी ने इन छंटनी की घोषणा की, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से अपनी रणनीति में बदलाव का संकेत दिया।
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क्या कहा कंपनी ने: अमेज़न की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (पीपल एक्सपीरियंस) बेथ गैलेटी ने कहा कि "AI की यह पीढ़ी इंटरनेट के बाद देखी गई सबसे क्रांतिकारी तकनीक है।" उन्होंने तर्क दिया कि कंपनी को और तेज गति से काम करने के लिए "लीन" (Lean) यानी कम कर्मचारियों वाले ढांचे की जरूरत है।
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अंदर की बात: हालांकि बाद में सीईओ एंडी जेसी ने इसे "कल्चरल शिफ्ट" बताया, लेकिन संदेश साफ था—अमेज़न अब उन भूमिकाओं को कम कर रहा है जिन्हें AI द्वारा स्वचालित (Automate) किया जा सकता है, ताकि वह इनोवेशन पर फोकस कर सके।
2. माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft): "AI का इस्तेमाल अब वैकल्पिक नहीं है"
सॉफ्टवेयर जाएंट माइक्रोसॉफ्ट ने 2025 में कम से कम चार बड़े राउंड्स में लगभग 15,000 नौकरियों में कटौती की। कंपनी ने न सिर्फ लोगों को निकाला, बल्कि बचे हुए कर्मचारियों के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है।
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AI बना परफॉरमेंस का पैमाना: माइक्रोसॉफ्ट के डेवलपर डिवीजन की प्रेसिडेंट जूलिया लियूसन ने मैनेजरों को निर्देश दिया कि कर्मचारियों के परफॉरमेंस रिव्यू में अब "AI के इस्तेमाल" को भी शामिल किया जाए।
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चेतावनी: इंटरनल ईमेल्स में साफ कहा गया कि "AI का उपयोग अब वैकल्पिक (Optional) नहीं है—यह हर रोल का कोर हिस्सा है।" यानी जो कर्मचारी AI टूल्स (जैसे Copilot) का उपयोग नहीं करेंगे, उनकी नौकरी पर भी तलवार लटक सकती है।
3. सेल्सफोर्स (Salesforce): "आधा काम अब AI कर रहा है"
CRM की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी सेल्सफोर्स ने सितंबर में एक बड़ा खुलासा किया। कंपनी ने कस्टमर सपोर्ट की 4,000 नौकरियों को खत्म कर दिया और इसकी वजह सीधे तौर पर AI ऑटोमेशन को बताया।
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सीईओ का बयान: सेल्सफोर्स के सीईओ मार्क बेनिऑफ ने पुष्टि की कि कंपनी में अब "50% तक काम" AI एजेंट्स कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि "हमें अब सपोर्ट फंक्शन्स के लिए कम लोगों की जरूरत है।"
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एजेंटिक AI: बेनिऑफ ने इसे अपने करियर के सबसे रोमांचक महीने बताया और कहा कि पहले जहां लाखों लीड्स पर कॉल नहीं हो पाती थी, अब AI एजेंट्स हर कस्टमर को कॉल कर रहे हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि कॉल सेंटर और सपोर्ट की नौकरियों पर सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
4. आईबीएम (IBM): HR की कुर्सी पर बैठा AI
आईबीएम (IBM) उन पहली कंपनियों में से थी जिसने खुलकर कहा था कि वे उन पदों पर भर्ती रोक देंगे जिन्हें AI कर सकता है। 2025 में कंपनी ने इस पर अमल भी किया।
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HR रिप्लेसमेंट: आईबीएम के सीईओ अरविंद कृष्णा ने खुलासा किया कि AI चैटबॉट्स ने कंपनी में कई सौ HR (Human Resources) भूमिकाओं को रिप्लेस कर दिया है।
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रणनीति: कंपनी ने मार्केटिंग और कम्युनिकेशंस में भी छंटनी की। कृष्णा का कहना है कि वे अब सिर्फ उन क्षेत्रों में भर्ती कर रहे हैं जहाँ "गहन सोच" (Deep Critical Thinking) की जरूरत है, जैसे इंजीनियरिंग और सेल्स। बाकी रूटीन काम अब AI एजेंट्स के हवाले हैं।
क्या यह सिर्फ एक बहाना है?
विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि कोरोना काल में कंपनियों ने जरूरत से ज्यादा भर्ती (Overhiring) कर ली थी और अब मंदी व महंगाई से निपटने के लिए वे AI को एक "बहाने" के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं ताकि अपनी गलतियों को छुपा सकें। लेकिन ऑक्सफोर्ड इंटरनेट इंस्टीट्यूट जैसे संस्थान मानते हैं कि यह वास्तव में एक स्ट्रक्चरल बदलाव है।
निष्कर्ष: 2025 की ये छंटनी एक चेतावनी है। जो काम रिपीटिटिव (Repetitive) हैं या डेटा आधारित हैं, वे अब सुरक्षित नहीं हैं। अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट, सेल्सफोर्स और आईबीएम का यह कदम बताता है कि आने वाले समय में सिर्फ वही कर्मचारी सुरक्षित रहेंगे जो AI का इस्तेमाल करना जानते हैं, न कि वे जो AI से मुकाबला करने की कोशिश करेंगे।