Sambhajinagar Police Bharti: 18 पदों के लिए इंजीनियर और वकील लाइन में! बेरोजगारी की यह तस्वीर डराने वाली है
छत्रपति संभाजीनगर पुलिस भर्ती में बेरोजगारी का कड़वा सच सामने आया है। सिपाही (चालक) के मात्र 18 पदों के लिए इंजीनियर, वकील और एमबीए पास युवा दौड़ लगा रहे हैं। जानें क्या है भर्ती के आंकड़े और क्यों है सरकारी नौकरी की इतनी मारामारी।
छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): सरकारी नौकरी का नशा और बेरोजगारी का डर—इन दो चीजों ने आज शिक्षा के मायने बदल दिए हैं। छत्रपति संभाजीनगर पुलिस आयुक्तालय में चल रही पुलिस भर्ती (Police Recruitment) की तस्वीरें कुछ यही बयां कर रही हैं। यहां पुलिस कांस्टेबल (ड्राइवर) की भर्ती चल रही है, लेकिन दौड़ लगाने वालों में सिर्फ 12वीं पास युवा नहीं, बल्कि इंजीनियर (Engineer), वकील (Lawyer) और एमबीए (MBA) डिग्री होल्डर्स भी शामिल हैं।
मैदान पर पसीना बहा रहे इन उच्च शिक्षित युवाओं को देखकर यह सवाल खड़ा होता है कि क्या डिग्रियां सिर्फ कागज का टुकड़ा बनकर रह गई हैं?
आंकड़े जो हैरान कर देंगे
भर्ती प्रक्रिया के आंकड़े बताते हैं कि सरकारी नौकरी पाने के लिए युवा किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
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कुल पद (Vacancies): पुलिस चालक (Driver) के लिए कुल 18 पद रिक्त हैं।
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कुल आवेदन: इन 18 पदों के लिए 846 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
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उच्च शिक्षित उम्मीदवार: इनमें से 28 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके पास प्रोफेशनल डिग्रियां हैं।
कौन हैं ये 'हाई-क्वालिफाइड' उम्मीदवार?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन 28 उम्मीदवारों में शामिल हैं:
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इंजीनियर (B.E.): 5 उम्मीदवार।
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वकील (LLB): 2 उम्मीदवार।
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मैनेजमेंट (MBA): 3 उम्मीदवार।
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पोस्ट-ग्रेजुएट (M.A./M.Sc): 18 उम्मीदवार।
क्यों है सरकारी नौकरी की दौड़?
जब इन उम्मीदवारों से पूछा गया कि इतनी पढ़ाई के बाद वे ड्राइवर की नौकरी क्यों करना चाहते हैं, तो जवाब सीधा था—सुरक्षा (Security)।
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प्राइवेट का डर: उम्मीदवारों का कहना है कि प्राइवेट सेक्टर में नौकरी की कोई गारंटी नहीं है, कभी भी निकाला जा सकता है।
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सरकारी ठप्पा: पुलिस की नौकरी में समाज में इज्जत मिलती है और वेतन समय पर मिलता है।
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मजबूरी: मराठवाड़ा क्षेत्र में बड़ी कंपनियों की कमी के कारण इंजीनियरों और मैनेजमेंट छात्रों को उनकी योग्यता के अनुसार काम नहीं मिल पा रहा है।
भर्ती प्रक्रिया जारी
पुलिस मुख्यालय के ग्राउंड पर फिलहाल शारीरिक दक्षता परीक्षा (Physical Test) चल रही है।
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उम्मीदवारों को 1600 मीटर दौड़ और गोला फेंक (Shot Put) में अपनी क्षमता साबित करनी होगी।
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इसके बाद लिखित परीक्षा और ड्राइविंग टेस्ट होगा।
निष्कर्ष: छत्रपति संभाजीनगर की यह भर्ती प्रक्रिया देश में बेरोजगारी की स्थिति का एक 'लिटमस टेस्ट' है। जब एक वकील कोर्ट में बहस करने के बजाय पुलिस की गाड़ी चलाने के लिए लाइन में खड़ा हो, तो यह सिस्टम के लिए चिंता का विषय है।