Sambhajinagar ZP Result: महायुति का डंका! कांग्रेस और शरद पवार की NCP 1-1 सीट पर सिमटी; उबाठा को मिलीं सिर्फ 9 सीटें
छत्रपति संभाजीनगर जिला परिषद चुनाव में महायुति ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी (SP) को करारी हार का सामना करना पड़ा है, दोनों को सिर्फ 1-1 सीट मिली। उद्धव ठाकरे गुट (UBT) को 9 सीटों पर संतोष करना पड़ा। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र की राजनीति का केंद्र माने जाने वाले छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में महायुति (भाजपा, शिंदे शिवसेना और अजित पवार एनसीपी) ने जिला परिषद चुनावों में एकतरफा जीत हासिल की है। मंगलवार को आए नतीजों ने विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (MVA) की कमर तोड़कर रख दी है।
नतीजों ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में भी अब 'डबल इंजन सरकार' का जादू चल रहा है, जबकि विपक्ष पूरी तरह से बिखर चुका है।
कांग्रेस और 'तुतारी' का बुरा हाल
चुनाव परिणामों में सबसे चौंकाने वाली बात कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी (NCP-SP) का प्रदर्शन रही।
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सिर्फ 1-1 सीट: स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महापालिका चुनावों की तरह ही जिला परिषद में भी इन दोनों पार्टियों की हालत पतली हो गई है। कांग्रेस और शरद पवार गुट को पूरे जिले में सिर्फ 1-1 सीट पर जीत मिली है।
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जनता ने नकारा: यह नतीजा बताता है कि मराठवाड़ा के इस अहम जिले में अब शरद पवार और कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक पूरी तरह से खिसक कर महायुति की ओर चला गया है।
उद्धव ठाकरे (UBT) का प्रदर्शन
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट ने अपने सहयोगियों से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन वे भी सम्मानजनक स्कोर तक नहीं पहुंच पाए।
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9 सीटों पर सिमटी मशाल: उद्धव गुट को 9 सीटों पर जीत मिली है। यह आंकड़ा यह बताने के लिए काफी है कि पार्टी अपने पुराने गढ़ में कमजोर हो चुकी है और सहानुभूति की लहर अब खत्म हो गई है।
महायुति की आंधी
दूसरी ओर, भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने मिलकर बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार कर लिया।
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भाजपा: जिले में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।
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शिंदे सेना: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना ने ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत की है और 20 के करीब सीटें जीती हैं।
निष्कर्ष
छत्रपति संभाजीनगर जिला परिषद के नतीजे महाविकास अघाड़ी के लिए खतरे की घंटी हैं। विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, कांग्रेस और शरद पवार गुट का 'इकाई' के अंक (Single Digit) में सिमट जाना यह संकेत देता है कि विपक्ष को अपनी रणनीति पूरी तरह बदलनी होगी, वरना आने वाले समय में उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।