India-US Trade Deal: निर्यातकों की बल्ले-बल्ले! 18% तक बचेगा टैक्स, किसान और डेयरी सेक्टर सुरक्षित; जानें भारत को क्या मिला?
भारत और अमेरिका के बीच होने वाली 'मिनी ट्रेड डील' से भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा होगा। GSP की वापसी से जेम्स, ज्वैलरी और इंजीनियरिंग सामानों पर अमेरिकी टैक्स खत्म होगा। वहीं, भारत ने अपने किसानों और डेयरी सेक्टर को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचा लिया है। पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट।
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता (Trade Deal) अब अंतिम चरण में है। लंबी बातचीत और कूटनीतिक रस्साकशी के बाद, जो तस्वीर उभरकर सामने आई है, वह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक है। इस डील को "किसानों की सुरक्षा के साथ निर्यात की उड़ान" के रूप में देखा जा रहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट और सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत ने अमेरिका से GSP (Generalized System of Preferences) का दर्जा वापस हासिल करने में सफलता पाई है, जबकि अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस डील से भारत के व्यापारियों, किसानों और आम जनता को क्या फायदा होगा।
1. निर्यातकों को 18% तक का फायदा (GSP की वापसी)
इस डील की सबसे बड़ी जीत भारतीय निर्यातकों (Exporters) के लिए है।
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क्या है GSP? यह एक अमेरिकी योजना है जिसके तहत विकासशील देशों का सामान बिना किसी आयात शुल्क (Import Duty) के अमेरिका में बिक सकता है। 2019 में तत्कालीन ट्रम्प प्रशासन ने भारत से यह दर्जा छीन लिया था।
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फायदा क्या होगा? GSP वापस मिलने से भारतीय सामान (जैसे कपड़े, इंजीनियरिंग पार्ट्स, और हस्तशिल्प) पर अमेरिका में लगने वाला टैक्स (जो 3% से 15% तक होता था) अब शून्य (0%) हो जाएगा।
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सीधा असर: इसका मतलब है कि भारतीय सामान अब चीन या वियतनाम के मुकाबले अमेरिका में सस्ता और प्रतिस्पर्धी होगा। इसका सबसे ज्यादा फायदा सूरत और मुंबई के डायमंड/ज्वैलरी सेक्टर, टेक्सटाइल और केमिकल इंडस्ट्री को मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इन सेक्टर्स में मुनाफे का मार्जिन 10-18% तक बढ़ सकता है।
2. 'लक्ष्मण रेखा' बरकरार: खेती और डेयरी पर आंच नहीं
अमेरिका का सबसे बड़ा दबाव यह था कि भारत अपने बाजार अमेरिकी दूध, पनीर, गेहूं और सोयाबीन के लिए खोले।
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भारत का जवाब: भारतीय वार्ताकारों ने साफ कर दिया कि भारत में खेती और पशुपालन सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका है।
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सुरक्षा: भारत ने डेयरी और कृषि क्षेत्र को इस डील से पूरी तरह बाहर रखा है। यानी, अमेरिका का सस्ता और सब्सिडी वाला अनाज या दूध भारत में नहीं आएगा। यह भारतीय किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। साथ ही, 'ब्लड मील' (जानवरों के अवशेष से बना चारा) वाले अमेरिकी डेयरी उत्पादों को धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से भारत ने सख्त ना कह दिया है।
3. अमेरिका को क्या मिला? (कुछ पाना, कुछ खोना)
सौदा कभी एकतरफा नहीं होता। GSP के बदले भारत ने अमेरिका को कुछ छूट दी है:
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मेडिकल डिवाइस: अमेरिका की मांग थी कि उसके स्टेंट (Stents) और घुटने के प्रत्यारोपण (Knee Implants) जैसे उपकरणों पर भारत में लगी कीमत की सीमा (Price Cap) हटाई जाए। भारत ने 'ट्रेड मार्जिन रेशनलाइजेशन' (TMR) के तहत इन उपकरणों को एक निश्चित मुनाफे के साथ बेचने की अनुमति दी है। इससे भारत में अमेरिकी मेडिकल डिवाइस थोड़े महंगे हो सकते हैं, लेकिन उनकी उपलब्धता बढ़ेगी।
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अमेरिकी फल (सेब और अखरोट): 2019 के बदले में भारत ने अमेरिकी सेब, बादाम और अखरोट पर जो अतिरिक्त टैक्स लगाया था, उसे हटाया जा सकता है। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को वाशिंगटन के सेब सस्ते मिलेंगे।
4. इस डील के मायने
फरवरी 2026 में हो रही यह डील रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
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यह चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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भारत और अमेरिका के बीच सालाना व्यापार (Bilateral Trade) को 500 अरब डॉलर तक ले जाने के लिए यह एक नींव का काम करेगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, यह डील भारत की कूटनीतिक जीत है। सरकार ने औद्योगिक विकास और रोजगार (निर्यात के जरिए) को बढ़ावा देने के लिए रास्ता खोला है, लेकिन साथ ही अपने 'अन्नदाता' (किसानों) के हितों की बलि नहीं दी है। अब देखना यह है कि डील पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने के बाद यह जमीन पर कितनी जल्दी लागू होती है।