कन्नड़ के पूर्व विधायक हर्षवर्धन जाधव और किसान नेता शिंदे गुट में शामिल; मराठवाड़ा में शिवसेना (शिंदे) को बड़ी मजबूती

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी हलचल! छत्रपति संभाजीनगर के कन्नड़ से पूर्व विधायक हर्षवर्धन जाधव और किसान नेता जयाजीराव सूर्यवंशी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इसे उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पढ़ें पूरी राजनीतिक रिपोर्ट और विश्लेषण।

Feb 17, 2026 - 14:53
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कन्नड़ के पूर्व विधायक हर्षवर्धन जाधव और किसान नेता शिंदे गुट में शामिल; मराठवाड़ा में शिवसेना (शिंदे) को बड़ी मजबूती
हेडिंग: मराठवाड़ा में 'शिंदे सेना' का शक्ति प्रदर्शन: पूर्व विधायक हर्षवर्धन जाधव और कद्दावर किसान नेता के आने से बदलेगा कन्नड़ का सियासी समीकरण

छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों (Vidhan Sabha Elections) की आहट के साथ ही राजनीतिक दलों में तोड़-फोड़ और नेताओं के दल-बदल का सिलसिला तेज हो गया है। इसी कड़ी में मराठवाड़ा क्षेत्र, जो राज्य की राजनीति का एक अहम केंद्र माना जाता है, वहां मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली शिवसेना को एक बड़ी कामयाबी मिली है।

छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) जिले की कन्नड़ विधानसभा सीट से पूर्व विधायक और अपने आक्रामक तेवरों के लिए मशहूर हर्षवर्धन जाधव (Harshvardhan Jadhav) ने आधिकारिक तौर पर शिवसेना (शिंदे गुट) का दामन थाम लिया है। उनके साथ ही प्रदेश के प्रमुख किसान नेता और 'अन्नदाता शेतकरी संगठन' के अध्यक्ष जयाजीराव सूर्यवंशी (Jayaji Suryavanshi) ने भी 'धनुष-बाण' थाम लिया है।

इस राजनीतिक घटनाक्रम को मराठवाड़ा में उद्धव ठाकरे गुट (Shiv Sena UBT) के लिए एक बड़ा झटका और महायुति गठबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री की मौजूदगी में 'घर वापसी'

हर्षवर्धन जाधव और जयाजीराव सूर्यवंशी का पार्टी में प्रवेश मुंबई में मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास 'वर्षा' पर हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दोनों नेताओं का पार्टी का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। मुख्यमंत्री शिंदे ने इस मौके पर कहा कि इन दोनों नेताओं के आने से पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी और सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मराठवाड़ा में हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में महायुति को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले पुराने और मजबूत नेताओं को वापस लाना शिंदे गुट की रणनीति का अहम हिस्सा है।

हर्षवर्धन जाधव: एक फायरब्रांड नेता की वापसी

हर्षवर्धन जाधव की पहचान मराठवाड़ा की राजनीति में एक फायरब्रांड और बेबाक नेता के रूप में होती है। कन्नड़ विधानसभा क्षेत्र में उनका अपना एक मजबूत जनाधार है।

  • राजनीतिक सफर: जाधव ने अपने करियर की शुरुआत मनसे (MNS) से की थी और 2009 में पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद वे शिवसेना में शामिल हुए और 2014 में दोबारा जीत हासिल की। हालांकि, बाद में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और हार का सामना करना पड़ा।

  • पारिवारिक पृष्ठभूमि: हर्षवर्धन जाधव भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे (Raosaheb Danve) के दामाद हैं, हालांकि दोनों के बीच राजनीतिक और व्यक्तिगत रिश्ते काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं।

  • आक्रामक शैली: जाधव अपने आंदोलनों और प्रशासन के खिलाफ सीधे टकराव के लिए जाने जाते हैं। उनकी यह शैली युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को आकर्षित करती है।

शिंदे गुट में शामिल होने के बाद, जाधव ने कहा कि वे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों से प्रभावित हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य कन्नड़ निर्वाचन क्षेत्र का विकास और वहां के किसानों की समस्याओं का समाधान करना है।

जयाजीराव सूर्यवंशी: किसानों की बुलंद आवाज

हर्षवर्धन जाधव के साथ-साथ जयाजीराव सूर्यवंशी का शिवसेना में शामिल होना एकनाथ शिंदे के लिए 'सोने पे सुहागा' जैसा है। सूर्यवंशी 'अन्नदाता शेतकरी संगठन' के संस्थापक अध्यक्ष हैं और मराठवाड़ा में किसानों के मुद्दों पर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।

  • सूर्यवंशी का प्रभाव क्षेत्र केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि परभणी, धाराशिव और बीड़ जैसे जिलों में भी उनकी पकड़ मानी जाती है।

  • मराठवाड़ा में किसान आत्महत्या और पानी की समस्या बड़े मुद्दे हैं। ऐसे में एक किसान नेता को अपने साथ जोड़कर शिंदे गुट ने विपक्ष के उन आरोपों को कुंद करने की कोशिश की है, जिनमें सरकार को किसान विरोधी बताया जाता है।

कन्नड़ विधानसभा सीट का समीकरण: UBT की मुश्किलें बढ़ीं

हर्षवर्धन जाधव की एंट्री से कन्नड़ विधानसभा सीट का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। वर्तमान में इस सीट पर उद्धव ठाकरे गुट (Shiv Sena UBT) के उदय सिंह राजपूत (Uday Singh Rajput) विधायक हैं।

  • आमने-सामने की टक्कर: आगामी चुनाव में अब मुकाबला 'हर्षवर्धन जाधव बनाम उदय सिंह राजपूत' होने की प्रबल संभावना है। 2019 के चुनाव में जाधव निर्दलीय लड़े थे और उन्हें हार मिली थी, लेकिन उन्हें मिले वोटों की संख्या बताती है कि उनका आधार अभी भी मजबूत है। अब सत्ताधारी पार्टी (महायुति) के समर्थन के साथ वे एक मजबूत उम्मीदवार साबित हो सकते हैं।

  • वोट बैंक: कन्नड़ क्षेत्र में मराठा समुदाय का वोट बैंक निर्णायक है। हर्षवर्धन जाधव मराठा समुदाय से आते हैं और मराठा आरक्षण आंदोलन की पृष्ठभूमि में उनकी उम्मीदवारी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

मराठवाड़ा में शिंदे की 'सोशल इंजीनियरिंग'

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एकनाथ शिंदे मराठवाड़ा में एक विशेष 'सोशल इंजीनियरिंग' पर काम कर रहे हैं। लोकसभा चुनावों में मराठा आरक्षण के मुद्दे के कारण महायुति को नुकसान हुआ था। अब शिंदे गुट ऐसे नेताओं को पार्टी में ला रहा है जो स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली हैं और मराठा समाज के साथ-साथ किसानों में भी अच्छी पैठ रखते हैं।

हर्षवर्धन जाधव और जयाजीराव सूर्यवंशी का शामिल होना इसी रणनीति का हिस्सा है। जाधव जहां राजनीतिक आक्रामकता लाते हैं, वहीं सूर्यवंशी किसानों के मुद्दों पर पार्टी को विश्वसनीयता प्रदान करते हैं।

महायुति के लिए चुनौती और अवसर

हालांकि, जाधव की एंट्री से महायुति के अंदरूनी समीकरण भी थोड़े उलझ सकते हैं। कन्नड़ सीट पर भाजपा और शिवसेना (शिंदे) दोनों के स्थानीय कार्यकर्ता दावा करते रहे हैं। जाधव के भाजपा नेता रावसाहेब दानवे के साथ तल्ख रिश्तों के चलते भाजपा का स्थानीय कैडर कितना सहयोग करेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन, मुख्यमंत्री शिंदे का मानना है कि "जीतने की क्षमता" (Winnability) ही टिकट का आधार होगी, और इस पैमाने पर जाधव फिट बैठते नजर आ रहे हैं।

आगे क्या?

आने वाले दिनों में छत्रपति संभाजीनगर जिले में और भी कई बड़े नेता पाला बदल सकते हैं। हर्षवर्धन जाधव ने संकेत दिए हैं कि उनके साथ कई सरपंच, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य भी शिंदे गुट में शामिल होंगे। यदि ऐसा होता है, तो कन्नड़ तहसील में उद्धव ठाकरे गुट का संगठन कमजोर हो सकता है।