Maharashtra Jails: अब जेल में बंद बुजुर्ग कैदियों को भी मिलेगा 5 लाख का फ्री इलाज, 'आयुष्मान भारत' के तहत नई पहल
महाराष्ट्र की जेलों में बंद 70 वर्ष से अधिक उम्र के कैदियों के लिए अच्छी खबर। आयुष्मान भारत योजना (AB-PMJAY) के तहत अब उन्हें मिलेगा 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा। छत्रपति संभाजीनगर सेंट्रल जेल से हुई शुरुआत। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): अपराध चाहे जो भी हो, स्वास्थ्य और जीवन का अधिकार हर नागरिक का होता है। इसी मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, महाराष्ट्र के कारागार विभाग ने एक ऐतिहासिक और संवेदनशील कदम उठाया है। केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजना 'आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' (AB-PMJAY) का लाभ अब जेल की ऊंची दीवारों के पीछे बंद बुजुर्ग कैदियों को भी मिलने जा रहा है।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र की जेलों में बंद 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के कैदियों को इस योजना के दायरे में लाया गया है। इसकी शुरुआत छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) की हरसुल सेंट्रल जेल (Harsul Central Jail) से की गई है।
क्या है यह नई पहल?
हाल ही में केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना का विस्तार करते हुए देश के सभी 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को, चाहे उनकी आय कुछ भी हो, 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा देने की घोषणा की थी। इसी नियम का पालन करते हुए जेल प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि जेल में सजा काट रहे बुजुर्ग भी इस लाभ से वंचित न रहें।
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5 लाख का सुरक्षा कवच: पात्र बुजुर्ग कैदियों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा।
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वय वंदना कार्ड (Vaya Vandana Card): इस योजना के तहत कैदियों के 'आयुष्मान वय वंदना कार्ड' बनाए जा रहे हैं।
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निजी अस्पतालों में इलाज: जेल के अस्पतालों में सीमित सुविधाएं होती हैं। इस कार्ड के जरिए गंभीर बीमारियों की स्थिति में कैदियों को बाहर के बड़े इंपैनल (Empanelled) अस्पतालों में भर्ती कराया जा सकेगा।
हरसुल जेल में लगा विशेष कैंप
इस अभियान को धरातल पर उतारने के लिए छत्रपति संभाजीनगर की हरसुल सेंट्रल जेल में एक विशेष शिविर (Special Drive) का आयोजन किया गया। जेल प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के सहयोग से पात्र कैदियों की पहचान की।
जेल अधिकारियों के अनुसार:
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डेटा संग्रह: सबसे पहले जेल रिकॉर्ड से उन कैदियों की सूची बनाई गई जिनकी उम्र 70 वर्ष पार कर चुकी है।
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आधार वेरिफिकेशन: योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है। जिन कैदियों के पास आधार नंबर उपलब्ध थे, उनका बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन) वेरिफिकेशन मौके पर ही किया गया।
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कार्ड जनरेशन: वेरिफिकेशन सफल होने के बाद, मौके पर ही उनके आयुष्मान कार्ड जनरेट करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
बुजुर्ग कैदियों के लिए क्यों जरूरी है यह योजना?
जेलों में बंद बुजुर्ग आबादी अक्सर कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझती है। इनमें हृदय रोग, मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप, किडनी की समस्याएं और उम्र से जुड़ी अन्य बीमारियां शामिल हैं।
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सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा: अब तक जेल प्रशासन को कैदियों के बाहरी इलाज का पूरा खर्च उठाना पड़ता था। इस योजना के लागू होने से इलाज का खर्च बीमा कंपनी वहन करेगी, जिससे जेल विभाग के बजट पर बोझ कम होगा।
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बेहतर इलाज की गारंटी: कई बार फंड की कमी या प्रक्रिया में देरी के कारण कैदियों को उच्च स्तरीय इलाज मिलने में समय लगता था। आयुष्मान कार्ड से यह प्रक्रिया तेज और सुगम हो जाएगी।
प्रशासन का क्या कहना है?
हरसुल जेल के अधिकारियों ने बताया कि यह कदम कैदियों के मानवाधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है। जेल अधीक्षक ने कहा, "बुढ़ापे में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं। सरकार की यह योजना सुनिश्चित करती है कि कोई भी बुजुर्ग, भले ही वह जेल में हो, इलाज के अभाव में दम न तोड़े। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर पात्र कैदी का पंजीकरण हो जाए।"
पूरे राज्य में लागू होगा मॉडल
छत्रपति संभाजीनगर से शुरू हुई इस पहल को जल्द ही महाराष्ट्र की अन्य प्रमुख जेलों जैसे यरवदा (पुणे), आर्थर रोड (मुंबई), और नागपुर सेंट्रल जेल में भी लागू किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि राज्य की जेलों में बंद सैकड़ों बुजुर्ग कैदियों को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ा जा सके।
निष्कर्ष
'आयुष्मान भारत' का यह विस्तार साबित करता है कि कल्याणकारी राज्य की अवधारणा में समाज का हर वर्ग शामिल है, चाहे वह जेल के अंदर हो या बाहर। 70 साल से ऊपर के कैदियों को स्वास्थ्य सुरक्षा देना न केवल एक प्रशासनिक कदम है, बल्कि यह एक नैतिक जिम्मेदारी भी है, जो बताती है कि न्याय और करुणा साथ-साथ चल सकते हैं।