Sensex Nifty Today: शेयर बाजार में सुस्ती, सेंसेक्स 120 अंक टूटा; रुपये की रिकवरी भी नहीं भर पाई जोश
17 दिसंबर 2025 को शेयर बाजार में गिरावट। सेंसेक्स 84,559 और निफ्टी 25,818 पर बंद। FII की बिकवाली और अमेरिकी टैरिफ के डर से निवेशकों ने साधी चुप्पी। जानें दिनभर का हाल और एक्सपर्ट्स की राय।
मुंबई: सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन, बुधवार (17 दिसंबर 2025) को भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जहां एक तरफ भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक रिकवरी दर्ज की, वहीं दूसरी तरफ इक्विटी बाजार में निवेशकों का जोश ठंडा ही रहा। दिनभर के उतार-चढ़ाव भरे सत्र के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।
विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव (Trade Tensions) की खबरों ने बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर बनाए रखा है। हालांकि, निचले स्तरों से थोड़ी खरीदारी जरूर लौटी, जिससे भारी गिरावट टल गई।
बाजार का अंतिम स्कोर (Closing Bell Highlights)
बाजार बंद होने के समय के आंकड़े इस प्रकार रहे:
-
BSE Sensex: 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 120.21 अंक (0.14%) गिरकर 84,559.65 के स्तर पर बंद हुआ।
-
NSE Nifty: 50 शेयरों वाला निफ्टी 41.55 अंक (0.16%) फिसलकर 25,818.55 पर बंद हुआ।
-
Bank Nifty: बैंकिंग सेक्टर में भी दबाव देखा गया और इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।
आज बाजार गिरने की 4 बड़ी वजहें
बाजार में छाई इस सुस्ती के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण जिम्मेदार रहे:
-
विदेशी निवेशकों की बेरुखी (FII Selling): विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को FIIs ने 2,381 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी, और यह सिलसिला बुधवार को भी जारी रहने की आशंका है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण विदेशी पैसा भारत से बाहर जा रहा है।
-
अमेरिकी टैरिफ का डर (US Tariff Fears): अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर भारी टैरिफ लगाने की धमकियों और H-1B वीजा फीस में बढ़ोतरी की खबरों ने आईटी और फार्मा सेक्टर के निवेशकों को डरा दिया है। निवेशक "वेट एंड वॉच" (Wait and Watch) की स्थिति में हैं।
-
मुनाफावसूली (Profit Booking): बाजार जब भी ऊपर जाने की कोशिश करता है, ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली हावी हो जाती है। आज भी इंट्रा-डे में रिकवरी की कोशिश हुई, लेकिन टिक नहीं पाई।
-
वैश्विक संकेत (Global Cues): एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार रहा, जिससे भारतीय बाजार को कोई मजबूत सहारा नहीं मिल पाया।
सेक्टरल अपडेट: कौन चढ़ा, कौन गिरा?
आज के कारोबार में सेक्टर्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहा।
-
IT सेक्टर: अमेरिका में वीजा नियमों की सख्ती और खर्च बढ़ने के डर से आईटी शेयरों (TCS, Infosys, Wipro) में दबाव देखने को मिला।
-
बैंकिंग और फाइनेंशियल: आरबीआई (RBI) द्वारा रुपये को संभालने के लिए डॉलर बेचने की खबर के बाद बैंकिंग शेयरों में थोड़ी हलचल रही, लेकिन अंत में यह सपाट ही बंद हुए।
-
मेटल्स और एनर्जी: वैश्विक स्तर पर कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते मेटल शेयरों में कमजोरी रही। हालांकि, ब्रेंट क्रूड के 60 डॉलर के आसपास रहने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को थोड़ा सहारा मिला।
रुपये की शानदार वापसी (Rupee Recovery)
आज के दिन की सबसे बड़ी खबर करेंसी मार्केट से आई। पिछले 5 दिनों से लगातार गिर रहा रुपया आज संभल गया। आरबीआई (RBI) के दखल के बाद रुपये ने डॉलर के मुकाबले 55 पैसे की मजबूती दर्ज की और यह 90.38 के स्तर पर बंद हुआ। रुपये की यह मजबूती बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत हो सकती है, क्योंकि कमजोर रुपया आयात को महंगा करता है और महंगाई बढ़ाता है।
Top Gainers और Top Losers
निफ्टी के टॉप लूजर्स (Top Losers): बाजार को नीचे खींचने में जिन दिग्गजों का हाथ रहा, उनमें प्रमुख थे:
-
Adani Enterprises
-
Infosys
-
Tata Steel
-
HDFC Bank (मामूली गिरावट)
निफ्टी के टॉप गेनर्स (Top Gainers): गिरावट के माहौल में भी कुछ शेयरों ने हरियाली दिखाई:
-
Sun Pharma
-
Reliance Industries (RIL)
-
Bajaj Auto
-
ITC
एक्सपर्ट्स की राय: कल क्या करें?
बाजार के जानकारों का मानना है कि निफ्टी अभी 25,800 - 26,000 के दायरे (Range) में फंसा हुआ है।
-
HDFC सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि जब तक विदेशी बिकवाली नहीं रुकती, बाजार में बड़ी तेजी की उम्मीद कम है।
-
तकनीकी नजरिया: निफ्टी के लिए 25,700 एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल है। अगर यह टूटता है, तो गिरावट और बढ़ सकती है। वहीं, ऊपर की तरफ 26,000 का स्तर पार करना जरूरी है।
निवेशकों के लिए सलाह: एक्सपर्ट्स मौजूदा अस्थिरता (Volatility) को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। एकमुश्त निवेश करने के बजाय अच्छे शेयरों में धीरे-धीरे निवेश (SIP) करना बेहतर रणनीति हो सकती है। खासतौर पर उन सेक्टर्स पर नजर रखें जो घरेलू खपत (Domestic Consumption) से जुड़े हैं, क्योंकि उन पर वैश्विक तनाव का असर कम होता है।
निष्कर्ष
आज का दिन बाजार के लिए सुस्त रहा, लेकिन रुपये की रिकवरी ने एक उम्मीद की किरण दिखाई है। अब सभी की निगाहें अमेरिका और भारत के बीच चल रही ट्रेड बातचीत और एफआईआई (FII) के अगले कदम पर टिकी हैं। कल गुरुवार को साप्ताहिक एक्सपायरी (Weekly Expiry) होने के कारण बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।