Apple Vision Pro Crisis: 3 लाख का हेडसेट हुआ 'फ्लॉप'? प्रोडक्शन में 95% कटौती, जानें क्यों नहीं खरीद रहे लोग
Apple ने अपने सबसे महंगे गैजेट Vision Pro का प्रोडक्शन और मार्केटिंग 95% घटा दिया है। 2026 की शुरुआत में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3500 डॉलर के इस हेडसेट की बिक्री उम्मीद से बहुत कम रही है। जानें इसके फेल होने की वजहें।
क्यूपर्टिनो / नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी Apple के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बुरी खबर के साथ हुई है। जिस डिवाइस को Apple ने "कंप्यूटिंग का भविष्य" और "iPhone के बाद सबसे बड़ी क्रांति" बताया था, वह अब कंपनी के गले की फांस बनता दिख रहा है।
ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple ने अपने Vision Pro हेडसेट के प्रोडक्शन और मार्केटिंग में भारी कटौती की है। टाइम्स ऑफ इंडिया और फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि इस 3,500 डॉलर (करीब 3 लाख रुपये) वाले गैजेट की मांग में इतनी गिरावट आई है कि कंपनी को अपने कदम पीछे खींचने पड़ रहे हैं।
95% की कटौती: आंकड़े क्या कहते हैं?
मार्केट इंटेलिजेंस फर्म Sensor Tower के डेटा ने टेक जगत को चौंका दिया है।
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मार्केटिंग बजट: Apple ने पिछले साल Vision Pro के लिए अपने डिजिटल एडवरटाइजिंग बजट (Marketing Spend) में 95% से अधिक की कटौती की है। इसका मतलब है कि कंपनी अब इस प्रोडक्ट को प्रमोट करने में पैसा नहीं बहाना चाहती।
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प्रोडक्शन ठप: रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Apple के मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर Luxshare ने 2025 की शुरुआत में ही इसका प्रोडक्शन रोक दिया था।
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बिक्री के आंकड़े: इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (IDC) का अनुमान है कि 2025 की आखिरी तिमाही (Holiday Season) में Apple ने सिर्फ 45,000 यूनिट्स बेचीं। यह आंकड़ा Apple के अन्य प्रोडक्ट्स (जैसे iPhone, जो करोड़ों में बिकते हैं) के सामने न के बराबर है।
आखिर क्यों नहीं खरीद रहे लोग? (Why is it failing?)
जब Vision Pro लॉन्च हुआ था, तो इसे 'Spatial Computing' का चमत्कार माना गया था। लेकिन दो साल के भीतर ही इसका जादू फीका क्यों पड़ गया? इसके पीछे 3 मुख्य कारण माने जा रहे हैं:
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आसमान छूती कीमत (Price): Vision Pro की कीमत $3,499 (भारत में टैक्स मिलाकर और भी ज्यादा) है। इतने महंगे डिवाइस को खरीदना आम लोगों तो क्या, टेक प्रेमियों के लिए भी मुश्किल है। मंदी के दौर में लोग एक ऐसे गैजेट पर इतना पैसा खर्च नहीं करना चाहते जो सिर्फ "मनोरंजन" के लिए हो।
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वजन और असुविधा (Comfort Issues): यूजर्स ने शिकायत की है कि हेडसेट काफी भारी है और इसे ज्यादा देर तक पहनने से सिरदर्द और गर्दन में दर्द होता है।
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अक्टूबर 2025 में Apple ने M5 चिप के साथ एक अपडेटेड मॉडल भी लॉन्च किया था, लेकिन वह भी इन बुनियादी समस्याओं को दूर नहीं कर पाया।
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एप्स की कमी (Lack of Apps): किसी भी हार्डवेयर की सफलता उसके सॉफ्टवेयर पर निर्भर करती है। Vision Pro के लिए अभी भी "किलर ऐप्स" (Native Apps) की कमी है। YouTube और Netflix जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स ने इसके लिए डेडिकेटेड ऐप बनाने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई है।
Meta Quest ने मारी बाजी?
जहां Apple का Vision Pro संघर्ष कर रहा है, वहीं मार्क जुकरबर्ग की कंपनी Meta का सस्ता हेडसेट (Quest 3) बाजार में अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए है। कम कीमत और बेहतर गेमिंग लाइब्रेरी के कारण यूजर्स Meta की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं।
अब आगे क्या? क्या सस्ता मॉडल आएगा?
विश्लेषकों का मानना है कि Apple अभी हार मानने वाला नहीं है।
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सस्ता विजन प्रो: चर्चा है कि Apple 2026 के अंत तक एक "सस्ता" (Affordable) वर्जन लॉन्च कर सकता है, जिसमें कुछ फीचर्स कम होंगे लेकिन कीमत आम यूजर की पहुंच में होगी।
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स्मार्ट ग्लास: रिपोर्ट्स यह भी हैं कि Apple अब पूरी तरह से VR हेडसेट के बजाय AI-पावर्ड स्मार्ट ग्लास (Smart Glasses) पर फोकस शिफ्ट कर रहा है, जो पहनने में हल्के और ज्यादा व्यावहारिक होंगे।
निष्कर्ष
Vision Pro की मौजूदा स्थिति यह साबित करती है कि सिर्फ बेहतरीन तकनीक होना ही काफी नहीं है; प्रोडक्ट का व्यावहारिक और किफायती होना भी जरूरी है। क्या Apple अपनी इस गलती से सीखकर वापसी करेगा, या Vision Pro भी 'Google Glass' की तरह इतिहास बन जाएगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।