Aurangabad Civic Polls: महायुति टूटी, MVA में दरार! नामांकन के आखिरी दिन उमड़ी भीड़, संभाजीनगर में अब 'आमने-सामने' की जंग

छत्रपति संभाजीनगर समेत पूरे मराठवाड़ा में निकाय चुनावों से ठीक पहले महायुति गठबंधन टूट गया। बीजेपी और शिवसेना (शिंदे) के बीच सहमति न बनने से नामांकन केंद्रों पर अफरातफरी मच गई। नांदेड़ में कांग्रेस ने एमवीए से अलग राह चुनी। पढ़ें 31 दिसंबर 2025 की पूरी रिपोर्ट।

Dec 31, 2025 - 19:43
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Aurangabad Civic Polls: महायुति टूटी, MVA में दरार! नामांकन के आखिरी दिन उमड़ी भीड़, संभाजीनगर में अब 'आमने-सामने' की जंग
गठबंधन का 'द एंड': संभाजीनगर में महायुति टूटी, नामांकन के आखिरी दिन केंद्रों पर लगा उम्मीदवारों का मेला, मराठवाड़ा में सियासी भूचाल

छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): महाराष्ट्र के सियासी अखाड़े, विशेषकर मराठवाड़ा क्षेत्र में, साल 2025 का अंत एक बड़े राजनीतिक धमाके के साथ हुआ है। आगामी महानगरपालिका चुनावों (Civic Polls) से ठीक पहले सत्ताधारी गठबंधन 'महायुति' (Mahayuti) ताश के पत्तों की तरह बिखर गया है। छत्रपति संभाजीनगर, जालना, लातूर, परभणी और नांदेड़—इन पांचों प्रमुख शहरों में बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार) के बीच सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई, जिसके बाद सभी दलों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं।

इस 'ब्रेकअप' का असर मंगलवार और बुधवार (31 दिसंबर) को नामांकन केंद्रों पर साफ दिखाई दिया, जहां टिकट पाने की होड़ में उम्मीदवारों का हुजूम उमड़ पड़ा।

संभाजीनगर में क्यों टूटी महायुति?

छत्रपति संभाजीनगर में महायुति का टूटना सबसे ज्यादा चौंकाने वाला रहा, क्योंकि यहां गठबंधन की सरकार में मंत्री संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) और बीजेपी के अतुल सावे (Atul Save) जैसे दिग्गज नेता सक्रिय थे।

  • आरोप-प्रत्यारोप: शिवसेना (शिंदे) नेता संजय शिरसाट ने गठबंधन टूटने के लिए बीजेपी के स्थानीय नेताओं के "अहंकार" को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने जानबूझकर गठबंधन को सबोटाज (Sabotage) किया।

  • बीजेपी का पलटवार: दूसरी तरफ, बीजेपी नेताओं ने शिवसेना की मांगों को "अवास्तविक" बताया। मंत्री अतुल सावे ने आरोप लगाया कि शिरसाट अपने परिवार के सदस्यों के लिए टिकट का दबाव बना रहे थे, जिसे पार्टी ने स्वीकार नहीं किया।

  • परिणाम: मंगलवार सुबह जैसे ही गठबंधन टूटने की खबर फैली, दोनों पार्टियों के इच्छुक उम्मीदवार (Aspirants) अपने समर्थकों और वकीलों की फौज के साथ नामांकन दाखिल करने दौड़ पड़े।

नामांकन केंद्रों पर 'मेला' जैसा नजारा

गठबंधन टूटने के बाद अनिश्चितता का माहौल था, इसलिए हर कोई अपना पर्चा भरने की जल्दी में था।

  • वकीलों की मांग: नामांकन पत्रों में तकनीकी गलतियों से बचने के लिए उम्मीदवारों ने वकीलों को हायर किया हुआ था। चुनाव कार्यालयों के बाहर वकीलों और नोटरी वालों की भारी भीड़ थी।

  • SUVs का काफिला: कई उम्मीदवार महंगी एसयूवी कारों और सैकड़ों समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन करते हुए पहुंचे। शहर के सभी 9 जोन के कार्यालयों पर दिन भर जाम की स्थिति बनी रही।

  • शिवसेना की नाराजगी: शिवसेना के जिला प्रमुख राजेंद्र जंजाल ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर जमीनी कार्यकर्ताओं को न्याय नहीं मिला, तो वे गठबंधन स्वीकार नहीं करेंगे। आखिरकार वही हुआ, और अब शिवसेना सभी सीटों पर बीजेपी के खिलाफ ताल ठोक रही है।

नांदेड़ में कांग्रेस ने दिया MVA को झटका

सिर्फ महायुति ही नहीं, विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (MVA) में भी दरारें आ गई हैं।

  • नांदेड़ का हाल: नांदेड़-वाघाला मनपा चुनाव में कांग्रेस ने अपने सहयोगी शिवसेना (UBT) और एनसीपी (शरद पवार) से किनारा कर लिया है। कांग्रेस ने यहां प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के साथ हाथ मिला लिया है।

  • कांग्रेस यहां 61 सीटों पर और वीबीए 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिससे एमवीए का समीकरण पूरी तरह बिगड़ गया है।

अन्य जिलों का हाल

  • जालना: बीजेपी नेता कैलास गोरंट्याल ने पुष्टि की कि यहां भी महायुति टूट गई है। बीजेपी और शिवसेना ने सभी 65 सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं।

  • लातूर: पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक संभाजी पाटिल निलंगेकर ने गठबंधन टूटने का ठीकरा कांग्रेस और एनसीपी के स्थानीय गुटों पर फोड़ा। यहां बीजेपी और एनसीपी (अजित पवार) के बीच गठबंधन की उम्मीद थी, लेकिन स्थानीय पदाधिकारियों के विरोध के चलते बात नहीं बनी।

  • परभणी: यहां भी बीजेपी और शिवसेना के बीच सीट शेयरिंग की बातचीत बेनतीजा रही और गठबंधन टूट गया।

निष्कर्ष: अब 'फ्रेंडली' नहीं, असली फाइट

नामांकन की आपाधापी और गठबंधनों के टूटने से यह साफ हो गया है कि जनवरी 2026 में होने वाले ये निकाय चुनाव बेहद दिलचस्प और अप्रत्याशित होंगे। अब तक जो नेता एक मंच पर साथ बैठते थे, अब वे एक-दूसरे के खिलाफ रैलियां करेंगे। छत्रपति संभाजीनगर में अब मुकाबला बहुकोणीय (Multi-cornered) होगा, जिसमें बीजेपी, शिवसेना (शिंदे), शिवसेना (UBT), एआईएमआईएम और एनसीपी के दोनों गुट आमने-सामने होंगे। जनता के लिए यह फैसला करना मुश्किल होगा कि किसे चुनें, क्योंकि हर पार्टी अब 'विकास' का अकेला दावेदार बनकर उभरी है।