BJP Infighting: संभाजीनगर में 'महापौर' पद के लिए भिड़े बीजेपी के दिग्गज! शिरीष बोराळकर और राजू शिंदे गुट आमने-सामने

छत्रपति संभाजीनगर मनपा चुनाव से पहले बीजेपी में भारी कलह। मेयर पद के उम्मीदवार को लेकर स्थानीय कमेटी दो गुटों में बंट गई है। एक गुट शहराध्यक्ष शिरीष बोराळकर का समर्थक है तो दूसरा पूर्व डिप्टी मेयर राजू शिंदे का। जानें पूरी इनसाइड स्टोरी।

Feb 5, 2026 - 18:39
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BJP Infighting: संभाजीनगर में 'महापौर' पद के लिए भिड़े बीजेपी के दिग्गज! शिरीष बोराळकर और राजू शिंदे गुट आमने-सामने
संभाजीनगर बीजेपी में 'गृहयुद्ध': मेयर पद के लिए दो गुटों में ठनी, शिरीष बोराळकर और राजू शिंदे के समर्थकों में रस्साकशी

छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (CSMC) चुनावों का बिगुल बजते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अंदरूनी समीकरण बिगड़ते नजर आ रहे हैं। महायुति गठबंधन टूटने के बाद जहां पार्टी को एकजुट होकर विरोधियों का सामना करना चाहिए था, वहीं स्थानीय इकाई "महापौर कौन बनेगा?" (Who will be the Mayor?) के सवाल पर आपस में ही भिड़ गई है।

ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी की स्थानीय कोर कमेटी (Local Committee) मेयर पद के उम्मीदवार के चयन को लेकर दो स्पष्ट गुटों में बंट गई है। यह गुटबाजी अब बंद कमरों से निकलकर सड़कों और पार्टी कार्यालय तक पहुंच गई है, जिसने प्रदेश नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।

दो दावेदार, दो गुट: किसकी होगी जीत?

पार्टी के अंदर चल रही इस रस्साकशी के केंद्र में दो बड़े स्थानीय नेता हैं:

  1. शिरीष बोराळकर (Shirish Boralkar) गुट: पार्टी का एक बड़ा धड़ा मौजूदा शहराध्यक्ष शिरीष बोराळकर के समर्थन में है।

    • दलील: समर्थकों का कहना है कि बोराळकर एक निष्ठावान संगठनकर्ता हैं। उन्होंने पिछले कुछ सालों में शहर में पार्टी का जनाधार बढ़ाया है और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया है। इसलिए, 'चेहरा' उन्हें ही होना चाहिए।

    • रणनीति: यह गुट "संगठन सर्वोपरि" का नारा देकर यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि पैराशूट नेताओं के बजाय जमीन से जुड़े कार्यकर्ता को मौका मिलना चाहिए।

  2. राजू शिंदे (Raju Shinde) गुट: दूसरा गुट पूर्व डिप्टी मेयर और अनुभवी नेता राजू शिंदे की पैरवी कर रहा है।

    • दलील: शिंदे समर्थकों का तर्क है कि चुनाव जीतने के लिए केवल संगठन नहीं, बल्कि जन-स्वीकार्यता (Mass Appeal) की जरूरत है। राजू शिंदे का विभिन्न समाजों में अच्छा संपर्क है और उनके पास प्रशासन चलाने का अनुभव भी है।

    • पृष्ठभूमि: शिंदे कुछ साल पहले ही शिवसेना छोड़कर बीजेपी में आए थे, लेकिन उनके साथ एक बड़ा समर्थक वर्ग भी आया था जिसे पार्टी नाराज नहीं कर सकती।

बैठक में हुआ हंगामा

हाल ही में उम्मीदवारों के चयन के लिए बुलाई गई पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में यह मतभेद खुलकर सामने आ गया। सूत्रों के मुताबिक:

  • दोनों नेताओं के समर्थकों ने अपने-अपने नेता को प्रोजेक्ट करने के लिए नारेबाजी की।

  • स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि बैठक को बिना किसी ठोस निर्णय के समाप्त करना पड़ा।

  • वरिष्ठ नेताओं को डर है कि अगर जल्द ही कोई फैसला नहीं लिया गया, तो टिकट वितरण (Ticket Distribution) के दौरान बड़ी बगावत हो सकती है।

तीसरा विकल्प: 'मोदी के नाम पर चुनाव'

इन दोनों गुटों के बीच एक तीसरा मत भी उभर रहा है। कुछ वरिष्ठ नेताओं का सुझाव है कि पार्टी को किसी भी स्थानीय नेता को 'मेयर का चेहरा' घोषित करने से बचना चाहिए।

  • उनका मानना है कि चेहरा घोषित करने से दूसरा गुट नाराज होकर भितरघात (Sabotage) कर सकता है।

  • इसलिए, चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के चेहरे पर सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाना चाहिए।

विपक्ष को बैठे-बिठाए मिला मुद्दा

बीजेपी की इस आंतरिक कलह का सीधा फायदा विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) और एमआईएम (AIMIM) को मिलता दिख रहा है।

  • शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे ने तंज कसते हुए कहा, "जो पार्टी अपने घर में एक राय नहीं बना सकती, वह शहर का विकास क्या करेगी?"

  • उधर, महायुति से अलग हुई शिवसेना (शिंदे गुट) भी इस फूट का फायदा उठाकर बीजेपी के नाराज कार्यकर्ताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है।

अब आलाकमान के हाथ में फैसला

स्थानीय स्तर पर सहमति न बनने के कारण अब गेंद प्रदेश नेतृत्व के पाले में है। माना जा रहा है कि देवेंद्र फडणवीस जल्द ही संभाजीनगर का दौरा कर सकते हैं और दोनों गुटों के बीच सुलह कराने की कोशिश करेंगे। क्या पार्टी वफादारी (बोराळकर) को चुनेगी या जीतने की क्षमता (शिंदे) को? यह फैसला संभाजीनगर में बीजेपी का भविष्य तय करेगा।