Khaleda Zia Funeral: बांग्लादेश की 'लौह महिला' का अंतिम सफर, ढाका में उमड़ा लाखों का जनसैलाब, नम आंखों से दी गई विदाई
बांग्लादेश की पूर्व पीएम और बीएनपी चेयरपर्सन खालिदा जिया को अंतिम विदाई देने के लिए ढाका की सड़कों पर लाखों लोग उमड़ पड़े। कड़ी सुरक्षा के बीच उनका जनाजा निकाला गया। जानें बांग्लादेश की राजनीति के इस ऐतिहासिक और गमगीन दिन का पूरा हाल।
ढाका (बांग्लादेश): बुधवार, 31 दिसंबर 2025 का दिन बांग्लादेश के इतिहास में एक अध्याय के समाप्त होने के रूप में दर्ज हो गया। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की चेयरपर्सन और देश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया (Khaleda Zia) का अंतिम सफर आज आंसुओं, प्रार्थनाओं और भारी जनसमर्थन के बीच संपन्न हुआ।
लंबे समय से बीमार चल रहीं 79 वर्षीय खालिदा जिया के निधन की खबर ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया था। आज जब उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन और जनाजे (Namaz-e-Janaza) के लिए लाया गया, तो राजधानी ढाका की रफ्तार थम गई। नया पलटन (Naya Paltan) स्थित बीएनपी मुख्यालय से लेकर संसद भवन तक, जहां नजर गई, वहां सिर्फ लोगों के सिर ही दिखाई दे रहे थे।
ढाका में 'मानव समुद्र' का दृश्य
सुबह से ही ढाका की सड़कों पर बीएनपी समर्थकों और आम नागरिकों का हुजूम उमड़ना शुरू हो गया था। काले झंडे और खालिदा जिया की तस्वीरें हाथों में लिए लोग अपनी नेता की एक झलक पाने को बेताब थे।
-
नया पलटन में मातम: बीएनपी के केंद्रीय कार्यालय के सामने हजारों कार्यकर्ता फूट-फूट कर रोते देखे गए। पार्टी के झंडे को आधा झुका दिया गया था।
-
नारेबाजी: भीड़ "खालिदा जिया अमर रहें" और "मदर ऑफ डेमोक्रेसी" (लोकतंत्र की मां) के नारे लगा रही थी। माहौल गमगीन होने के साथ-साथ भावनात्मक रूप से बेहद चार्ज्ड था।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पिछले कई दशकों में किसी नेता के लिए ढाका में इतनी बड़ी भीड़ नहीं देखी गई। पुलिस और सुरक्षा बलों को भीड़ को नियंत्रित करने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।
संसद भवन प्लाज़ा में हुआ मुख्य जनाजा
खालिदा जिया के पार्थिव शरीर को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल से पहले उनके गुलशन स्थित आवास 'फिरोजा' ले जाया गया, जहां परिवार और करीबी नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद, मुख्य जनाजे (प्रार्थना सभा) के लिए शव को संसद भवन के साउथ प्लाज़ा लाया गया।
-
बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रतिनिधि, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और विदेशी राजनयिकों ने वहां पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
-
जनाजे की नमाज में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि संसद भवन के आसपास की कई किलोमीटर सड़कें पूरी तरह ब्लॉक हो गईं।
ज़ियाउर रहमान के बगल में या बननी में? (दफनाने की प्रक्रिया)
अंतिम संस्कार को लेकर भावनात्मक दृश्य तब बने जब उनके शव को दफनाने के लिए ले जाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफनाया गया। उनके ताबूत को बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज में लपेटा गया था। समर्थकों ने एम्बुलेंस पर फूलों की बारिश की।
खालिदा जिया का जीवन संघर्षों से भरा रहा। अपने पति और देश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान (Ziaur Rahman) की हत्या के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा था और तानाशाही के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी। आज उनके अंतिम सफर में वही संघर्ष और सम्मान झलक रहा था।
बीमारियों से लंबी लड़ाई और निधन
खालिदा जिया पिछले कई सालों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं।
-
उन्हें लीवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis), गठिया और हृदय संबंधी समस्याएं थीं।
-
पिछले कुछ हफ्तों से वे ढाका के एवरकेयर अस्पताल (Evercare Hospital) में लाइफ सपोर्ट पर थीं।
-
उनके निधन के साथ ही बांग्लादेश की राजनीति में 'बैटलिंग बेगम्स' (Battling Begums - खालिदा जिया और शेख हसीना) के दौर का एक हिस्सा हमेशा के लिए खामोश हो गया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
भीड़ की भयावहता और राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए ढाका में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
-
RAB और पुलिस तैनात: रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) और पुलिस के हजारों जवान तैनात थे।
-
CCTV निगरानी: जुलूस के पूरे रास्ते की ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही थी ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। हालांकि, समर्थकों का अनुशासन देखने लायक था और पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और भविष्य
खालिदा जिया के निधन से बीएनपी में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। उनके बेटे तारिक रहमान (Tarique Rahman), जो लंदन में निर्वासित जीवन जी रहे हैं, ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जनाजे में हिस्सा लिया और समर्थकों को संबोधित किया।
-
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खालिदा जिया के निधन के बाद मिलने वाली सहानुभूति लहर (Sympathy Wave) आगामी चुनावों में बीएनपी को मजबूत कर सकती है।
-
उनके धुर विरोधी राजनीतिक दलों ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है और इसे देश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
एक विरासत का अंत
तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया का जाना सिर्फ एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि एक युग का अंत है। उन्होंने देश में संसदीय लोकतंत्र की बहाली में अहम भूमिका निभाई थी। भले ही उनके अंतिम वर्षों में वे जेल और नजरबंदी में रहीं, लेकिन आज ढाका की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब गवाह है कि जनता के दिलों में उनका कद कितना बड़ा था।
बांग्लादेश आज अपनी 'नेत्री' को विदा कर रहा है, लेकिन उनकी राजनीतिक विरासत आने वाले कई दशकों तक देश की राजनीति को प्रभावित करती रहेगी।