Yemen Conflict Explosion: सऊदी अरब ने यमन में अपने ही सहयोगी UAE के 'हथियार डिपो' को उड़ाया! मुकल्ला पोर्ट पर भीषण एयरस्ट्राइक, दोनों देशों में जंग के आसार?
यमन युद्ध में नया मोड़। 30 दिसंबर 2025 को सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर एयरस्ट्राइक कर UAE द्वारा भेजे गए हथियारों को नष्ट कर दिया। यमन सरकार ने UAE के साथ रक्षा समझौता रद्द किया। जानें खाड़ी देशों में क्यों मची खलबली।
सना / रियाद / दुबई: मध्य पूर्व (Middle East) की भू-राजनीति में मंगलवार, 30 दिसंबर 2025 का दिन काले अक्षरों में लिखा जाएगा। यमन में पिछले एक दशक से हूतियों (Houthis) के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे दो सबसे करीबी सहयोगी—सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)—अब आमने-सामने आ गए हैं।
एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना ने यमन के पूर्वी बंदरगाह शहर मुकल्ला (Mukalla) पर हवाई हमले (Airstrikes) किए। हैरानी की बात यह है कि इस बार निशाना कोई आतंकी संगठन या हूती विद्रोही नहीं थे, बल्कि सऊदी अरब का अपना सहयोगी देश UAE था। रियाद ने दावा किया कि उसने UAE द्वारा भेजे गए हथियारों और बख्तरबंद गाड़ियों की एक बड़ी खेप को नष्ट कर दिया है, जो यमन के अलगाववादियों (Separatists) के लिए भेजी गई थी।
इस हमले ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) में दरार डाल दी है और यमन को एक नए और खतरनाक गृहयुद्ध की ओर धकेल दिया है।
30 दिसंबर की सुबह: मुकल्ला में क्या हुआ?
मंगलवार तड़के, जब मुकल्ला बंदरगाह शांत था, अचानक आसमान में सऊदी फाइटर जेट्स की गड़गड़ाहट सुनाई दी।
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निशाना: सऊदी वायुसेना ने बंदरगाह पर खड़े दो जहाजों से उतारे जा रहे कार्गो को निशाना बनाया।
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दावा: सऊदी रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, ये जहाज UAE के फुजैराह (Fujairah) पोर्ट से आए थे और इनमें भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और बख्तरबंद वाहन लदे थे।
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ट्रैकिंग बंद थी: सऊदी अधिकारियों ने बताया कि इन जहाजों ने रडार से बचने के लिए अपने 'ट्रैकिंग सिस्टम' बंद कर रखे थे, जो उनकी संदिग्ध मंशा को दर्शाता है।
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हमला: सऊदी जेट्स ने "सीमित सैन्य कार्रवाई" करते हुए हथियारों के जखीरे को बंदरगाह पर ही तबाह कर दिया। धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर तक देखा गया।
सऊदी अरब का तर्क: "सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं"
सऊदी अरब ने इस हमले को अपनी "राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए लक्ष्मण रेखा" (Red Line) बताया है। रियाद का आरोप है कि UAE यह हथियार यमन के अलगाववादी समूह 'साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल' (STC) को भेज रहा था।
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STC यमन के दक्षिणी हिस्से को अलग देश बनाना चाहता है, जिसका सऊदी अरब और यमन की केंद्रीय सरकार सख्त विरोध करती है।
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सऊदी बयान में कहा गया: "यह हथियार खेप यमन की स्थिरता और हमारी सीमाओं के लिए सीधा खतरा थी। हम अपनी नाक के नीचे विद्रोहियों को हथियारबंद होते नहीं देख सकते, चाहे मदद करने वाला हमारा 'भाई' (UAE) ही क्यों न हो।"
यमन सरकार का कड़ा एक्शन: UAE को 'नमस्ते'
इस हमले के तुरंत बाद, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार, जिसका नेतृत्व रशद अल-अलीमी (Rashad al-Alimi) कर रहे हैं, ने कड़े कदम उठाए।
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रक्षा समझौता रद्द: राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (PLC) ने UAE के साथ अपने सभी रक्षा समझौतों को तत्काल प्रभाव से रद्द (Cancel) कर दिया।
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इमरजेंसी: देश भर में 90 दिनों के लिए 'राष्ट्रीय आपातकाल' (State of Emergency) घोषित कर दिया गया है।
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अल्टीमेटम: यमन सरकार ने UAE की सेना को आदेश दिया है कि वे 24 घंटे के भीतर यमन की धरती छोड़ दें।
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नाकाबंदी: अगले 72 घंटों के लिए सभी बंदरगाहों और हवाई अड्डों को सील कर दिया गया है ताकि कोई नया हथियार देश में न आ सके।
UAE और STC की प्रतिक्रिया
इस हमले ने अबू धाबी (Abu Dhabi) को स्तब्ध कर दिया है।
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UAE की सफाई: संयुक्त अरब अमीरात ने हथियारों की तस्करी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे वाहन उनकी अपनी सेना के उपयोग के लिए थे, जो यमन में आतंकवाद विरोधी अभियानों में लगी है। उन्होंने सऊदी कार्रवाई पर "गहरी निराशा" जताई और "संयम" बरतने की अपील की।
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STC का गुस्सा: दूसरी तरफ, UAE समर्थित अलगाववादी समूह STC ने इसे "युद्ध की घोषणा" करार दिया है। मुकल्ला और अदन में STC के लड़ाकों ने अपनी पोजीशन संभाल ली है, जिससे सऊदी समर्थित सरकारी सेना के साथ सीधी भिड़ंत का खतरा बढ़ गया है।
दो दोस्तों के बीच 'दुश्मनी' की वजह
सऊदी अरब और UAE, दोनों ही सुन्नी मुस्लिम ताकतें हैं और यमन में ईरान समर्थित हूतियों के खिलाफ 2015 से साथ लड़ रहे थे। लेकिन पिछले कुछ सालों में इनके रास्ते अलग हो गए हैं।
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सऊदी अरब का लक्ष्य: यमन को एक रखना और अपनी दक्षिणी सीमा को सुरक्षित करना।
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UAE का लक्ष्य: यमन के रणनीतिक बंदरगाहों (जैसे अदन और सोकोत्रा) पर नियंत्रण करना और दक्षिणी यमन को अलग करवाकर अपना प्रभाव जमाना। यही हितों का टकराव (Conflict of Interest) आज बमबारी तक पहुंच गया है।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना यमन युद्ध का स्वरूप बदल देगी।
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हूतियों को फायदा: जब दुश्मन आपस में लड़ेंगे, तो सबसे ज्यादा खुश हूती विद्रोही होंगे। वे इस अराजकता का फायदा उठाकर और अधिक इलाकों पर कब्जा कर सकते हैं।
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तेल की कीमतें: खाड़ी के दो बड़े तेल उत्पादकों के बीच तनाव से वैश्विक तेल बाजार में घबराहट फैल सकती है।
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अमेरिकी चिंता: अमेरिका के लिए यह सिरदर्द है क्योंकि उसके दो प्रमुख सहयोगी आपस में भिड़ गए हैं, जिससे लाल सागर (Red Sea) की सुरक्षा कमजोर हो सकती है।
निष्कर्ष
30 दिसंबर की एयरस्ट्राइक ने साबित कर दिया है कि यमन अब सिर्फ एक गृहयुद्ध नहीं, बल्कि क्षेत्रीय ताकतों के 'पॉवर गेम' का अखाड़ा बन चुका है। सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, भले ही इसके लिए उसे अपने पुराने दोस्त पर बम क्यों न बरसाने पड़ें। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्या कूटनीति इस आग को बुझा पाएगी, या यमन एक और विनाशकारी अध्याय का गवाह बनेगा।
अस्वीकरण: यह लेख 30 दिसंबर 2025 की ताजा मीडिया रिपोर्ट्स (CNN, Al Jazeera, Dawn) और आधिकारिक बयानों पर आधारित है।
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