Sam Altman on Google: "अगर Google ने हमें गंभीरता से लिया होता, तो आज OpenAI खत्म हो चुका होता"
OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने किया बड़ा खुलासा। उन्होंने माना कि अगर 2023 में Google ने OpenAI को गंभीरता से लिया होता, तो ChatGPT का अस्तित्व खतरे में होता। जानें कैसे एक 'गलती' ने OpenAI को बनाया AI का बादशाह।
सैन फ्रांसिस्को / नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में आज OpenAI का नाम सबसे ऊपर है, और इसका प्रोडक्ट ChatGPT घर-घर में मशहूर हो चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब यह कंपनी खत्म होने की कगार पर हो सकती थी? यह खुलासा किसी और ने नहीं, बल्कि खुद OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) ने किया है।
दिसंबर 2025 में दिए गए एक ताज़ा इंटरव्यू में ऑल्टमैन ने स्वीकार किया कि टेक दिग्गज Google की एक 'रणनीतिक चूक' ने OpenAI को आज इस मुकाम तक पहुँचाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर Google ने शुरुआत में उन्हें गंभीरता से लिया होता, तो OpenAI आज "बहुत बुरी स्थिति" में होती।
"Google हमें कुचल सकता था" (Google Could Have Smashed Us)
'बिग टेक्नोलॉजी पॉडकास्ट' (Big Technology Podcast) में एलेक्स कांट्रोविट्ज़ से बात करते हुए, सैम ऑल्टमैन ने Google की शुरुआती सुस्ती पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि जब ChatGPT लॉन्च हुआ था, तब Google सो रहा था।
ऑल्टमैन ने कहा:
"ईमानदारी से कहूं तो, अगर Google ने 2023 में हम पर ध्यान केंद्रित किया होता, तो हम वास्तव में बहुत बुरी जगह पर होते। मुझे लगता है कि वे हमें आसानी से कुचल सकते थे (smash us)। उनके पास संसाधन, डेटा और टैलेंट का भंडार था, लेकिन उन्होंने हमें गंभीरता से नहीं लिया।"
यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि कैसे Google, जिसने एआई की बुनियादी तकनीक (Transformer models) का आविष्कार किया था, अपने ही प्रोडक्ट को लॉन्च करने में हिचकिचाता रहा। इसी "इनोवेटर्स डिलेमा" (Innovator's Dilemma) का फायदा उठाकर OpenAI ने बाजी मार ली।
अब स्थिति बदल गई है: Google बना सबसे बड़ा खतरा
सैम ऑल्टमैन ने यह भी माना कि 2023 वाला Google और 2025 वाला Google अलग है। अब Google पूरी तरह से जाग चुका है और OpenAI के लिए एक "विशाल खतरा" (Huge Threat) बन गया है।
Google के Gemini मॉडल्स की तेजी से बढ़ती क्षमताओं ने OpenAI को बैकफुट पर धकेल दिया है। ऑल्टमैन ने कहा:
"Google अब भी एक बहुत बड़ा खतरा है। वे एक बेहद शक्तिशाली कंपनी हैं। उनका बिजनेस मॉडल टेक इंडस्ट्री में सबसे मजबूत है और हमें उन्हें हराने में काफी समय लग सकता है।"
यह डर OpenAI के हालिया कदमों में भी झलकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, OpenAI ने हाल ही में आंतरिक रूप से "कोड रेड" (Code Red) जारी किया है।
OpenAI में 'कोड रेड' और साइड प्रोजेक्ट्स पर रोक
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, Google और Apple से मिल रही कड़ी टक्कर के कारण OpenAI ने अपनी रणनीति बदल दी है।
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मूनशॉट प्रोजेक्ट्स पर रोक: सैम ऑल्टमैन ने कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे फिलहाल नए और प्रयोगात्मक प्रोजेक्ट्स (जैसे Sora वीडियो जनरेटर) को रोक दें।
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फोकस सिर्फ ChatGPT पर: पूरा जोर अब ChatGPT की परफॉरमेंस और विश्वसनीयता सुधारने पर है।
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Apple का खतरा: दिलचस्प बात यह है कि ऑल्टमैन ने हाल ही में कहा था कि लंबी दौड़ में उनका असली प्रतिद्वंद्वी Google नहीं, बल्कि Apple है, क्योंकि भविष्य सॉफ्टवेयर का नहीं, बल्कि 'डिवाइस' का होगा।
Google की गलती से क्या सबक मिला?
टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि Google ने ChatGPT को एक छोटे स्टार्टअप का प्रोडक्ट समझकर नजरअंदाज किया था। उन्हें लगा कि उनका सर्च इंजन बिजनेस (Search Business) सुरक्षित है। लेकिन ChatGPT ने लोगों के इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका ही बदल दिया।
सैम ऑल्टमैन का यह बयान साबित करता है कि टेक दुनिया में कोई भी कंपनी, चाहे वह कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अगर वह समय के साथ नहीं बदलती, तो एक छोटा सा स्टार्टअप भी उसकी नींव हिला सकता है।
निष्कर्ष
सैम ऑल्टमैन का यह बयान उनकी विनम्रता नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यह दिखाता है कि AI की यह रेस अभी खत्म नहीं हुई है। जहाँ एक तरफ OpenAI अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं Google अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में लौट आया है। आने वाला साल (2026) यह तय करेगा कि AI का असली राजा कौन होगा—वह जिसने शुरुआत की, या वह जो अब पूरी ताकत से जाग उठा है।