Sambhajinagar Polls Revolt: टिकट कटने पर बीजेपी और AIMIM में बगावत! दफ्तरों पर हंगामा, संभाजीनगर में असंतुष्टों ने बढ़ाई टेंशन

छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका चुनाव (CSMC 2026) के लिए टिकट वितरण के बाद बीजेपी और एआईएमआईएम में भारी बगावत। नाराज कार्यकर्ताओं ने पार्टी दफ्तरों पर किया प्रदर्शन और नारेबाजी। निर्दलीय लड़ने की दी धमकी। पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट।

Dec 31, 2025 - 19:47
Dec 31, 2025 - 21:34
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Sambhajinagar Polls Revolt: टिकट कटने पर बीजेपी और AIMIM में बगावत! दफ्तरों पर हंगामा, संभाजीनगर में असंतुष्टों ने बढ़ाई टेंशन
संभाजीनगर में 'टिकट' पर तांडव: बीजेपी और AIMIM में बगावत की आग, नाराज कार्यकर्ताओं ने दफ्तर घेरे, निर्दलीय लड़ने का ऐलान

छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (CSMC) के आगामी चुनावों के लिए जैसे ही राजनीतिक दलों ने अपनी उम्मीदवारों की सूचियां जारी कीं, वैसे ही शहर की राजनीति में भूचाल आ गया। टिकट न मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। सबसे ज्यादा बगावत के सुर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) में सुनाई दे रहे हैं।

मंगलवार (30 दिसंबर) को दोनों पार्टियों के कार्यालयों के बाहर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जहां सैकड़ों नाराज समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की और अपने नेताओं पर पक्षपात का आरोप लगाया।

BJP कार्यालय पर हंगामा: "बाहरी लोगों को टिकट क्यों?"

बीजेपी की शहर इकाई में स्थिति विस्फोटक हो गई है। पार्टी द्वारा कई वॉर्डों में 'नए चेहरों' और 'आयातित उम्मीदवारों' (Imported Candidates) को टिकट दिए जाने से पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ता भड़क गए हैं।

  • पद्मपुरा में प्रदर्शन: बड़ी संख्या में नाराज कार्यकर्ता बीजेपी के शहर कार्यालय (पद्मपुरा) पहुंचे और शहर अध्यक्ष शिरीष बोराळकर (Shirish Boralkar) का घेराव किया।

  • क्या है नाराजगी: सतारा-देवलाई (Satara-Deolai) क्षेत्र से बीजेपी के इच्छुक उम्मीदवार सोमनाथ शेलके और उनके समर्थकों ने आरोप लगाया कि पार्टी ने उन लोगों को टिकट दिया है जिनका संगठन से कोई लेना-देना नहीं है। शेलके ने कहा, "हमने सालों तक पार्टी के लिए पसीना बहाया, लेकिन जब बारी आई तो हमें दूध में से मक्खी की तरह निकाल फेंक दिया गया।"

  • धमकी: कई नाराज नेताओं ने चेतावनी दी है कि वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन भरेंगे और बीजेपी के आधिकारिक उम्मीदवार को हराएंगे।

AIMIM में भी 'बगावत' का बिगुल

एआईएमआईएम, जो शहर की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत मानी जाती है, भी आंतरिक कलह से अछूती नहीं रही।

  • रोशन गेट पर बवाल: पार्टी के मुख्यालय 'दारुस्सलाम' (Roshan Gate) के बाहर नाराज कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया।

  • इम्तियाज जलील निशाने पर: प्रदर्शनकारी, विशेष रूप से सिडको (CIDCO) एन-9 वॉर्ड के पूर्व पार्षद सलीम खान, ने पूर्व सांसद और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज जलील (Imtiaz Jaleel) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि टिकट वितरण में पारदर्शिता नहीं बरती गई और वफादारों की अनदेखी की गई।

  • इस्तीफे की लहर: खबर है कि टिकट कटने से नाराज कई पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी है।

शिंदे गुट और ठाकरे गुट भी परेशान

सिर्फ बीजेपी और एमआईएम ही नहीं, बल्कि शिवसेना के दोनों गुटों (शिंदे और ठाकरे) में भी असंतोष सुलग रहा है।

  • शिंदे सेना: महायुति टूटने के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के पास सभी सीटों पर लड़ने का मौका है, लेकिन कई वार्डों में एक ही टिकट के लिए 4-5 दावेदार होने से सिरदर्द बढ़ गया है।

  • उद्धव सेना: शिवसेना (UBT) में भी दूसरे दलों से आए नेताओं को टिकट देने पर पुराने शिवसैनिक नाराज हैं।

निर्दलीय बिगाड़ेंगे खेल?

इस बगावत का सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है।

  1. वोट कटवा: अगर ये बागी निर्दलीय लड़ते हैं, तो वे अपनी ही पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के वोट काटेंगे।

  2. विपक्ष को फायदा: बीजेपी की बगावत का फायदा एमवीए (MVA) को और एआईएमआईएम की बगावत का फायदा कांग्रेस या अन्य मुस्लिम उम्मीदवारों को मिल सकता है।

नेताओं की सफाई

हंगामे के बाद बीजेपी शहराध्यक्ष शिरीष बोराळकर ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने कहा, "पार्टी एक परिवार की तरह है। टिकट कम हैं और दावेदार ज्यादा, इसलिए नाराजगी स्वाभाविक है। हम नाराज कार्यकर्ताओं से बात कर रहे हैं और उन्हें मना लेंगे।"

वहीं, एआईएमआईएम नेताओं ने कहा कि टिकट वितरण सर्वे और जीतने की क्षमता (Winability) के आधार पर किया गया है, किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ है।

निष्कर्ष

नामांकन की आखिरी तारीख बीतने के बाद अब बागी उम्मीदवारों को नाम वापस लेने (Withdrawal) के लिए मनाने का दौर शुरू होगा। अगले कुछ दिन संभाजीनगर की राजनीति में 'मान-मनौव्वल' और 'राजनीतिक सौदेबाजी' के रहेंगे। देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी पार्टी अपने 'घर के झगड़े' को सुलझा पाती है और कौन बगावत की आग में झुलसती है।