Rupee Rebound News: रुपये की ऐतिहासिक वापसी! 5 दिन की गिरावट थमी, डॉलर के मुकाबले सुधरी सेहत

लगातार 5 दिनों की गिरावट और ऑल-टाइम लो (All-time low) छूने के बाद भारतीय रुपये में 55 पैसे का सुधार। जानें कैसे RBI के हस्तक्षेप और बैंकों की डॉलर बिक्री ने रुपये को 91 के पार जाने से रोका।

Dec 17, 2025 - 21:34
 0
Rupee Rebound News: रुपये की ऐतिहासिक वापसी! 5 दिन की गिरावट थमी, डॉलर के मुकाबले सुधरी सेहत
डॉलर के मुकाबले रुपये ने ली चैन की सांस: ऐतिहासिक गिरावट के बाद शानदार वापसी, 5 दिनों का 'वन-वे' स्लाइड थमा

मुंबई: पिछले कुछ दिनों से भारतीय मुद्रा (Rupee) पर छाया संकट का बादल आखिरकार थोड़ा छंटता नजर आया। बुधवार (17 दिसंबर, 2025) को रुपये ने अपनी लगातार 5 दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जोरदार वापसी की।

मंगलवार को जब रुपया अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था, तब बाजार में घबराहट का माहौल था। लेकिन बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सक्रिय हस्तक्षेप और कुछ सकारात्मक संकेतों ने घरेलू मुद्रा को सहारा दिया।

आइए विस्तार से जानते हैं कि बाजार में क्या हुआ और रुपये की इस रिकवरी के पीछे असली वजह क्या रही।

बाजार का हाल: आंकड़ों की जुबानी (Market Figures)

बुधवार का कारोबारी सत्र रुपये के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन अंत सुखद रहा।

  • ओपनिंग (Opening): रुपये की शुरुआत कमजोर रही और यह 91.05 प्रति डॉलर पर खुला।

  • इंट्रा-डे हाई (Intra-day High): कारोबार के दौरान रुपये ने जबरदस्त मजबूती दिखाई और एक समय यह 89.96 के स्तर तक सुधर गया था।

  • क्लोजिंग (Closing): अंत में रुपया 55 पैसे की मजबूती के साथ 90.38 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

  • रिकवरी: पिछले सत्र के मुकाबले इसमें 97 पैसे तक की रिकवरी (लो से हाई तक) देखी गई।

याद रहे कि मंगलवार को रुपया पहली बार 91 के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़कर 91.14 के ऑल-टाइम लो (All-time low) पर पहुंच गया था।

गिरावट पर ब्रेक किसने लगाया? (What Halted the Slide?)

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि रुपये की इस वापसी का सबसे बड़ा श्रेय आरबीआई (RBI) को जाता है।

  1. RBI का आक्रामक हस्तक्षेप: बैंकरों के अनुसार, जब रुपया लगातार गिर रहा था, तब केंद्रीय बैंक ने आक्रामक रूप से डॉलर बेचना शुरू किया। यह हस्तक्षेप न केवल 'स्पॉट मार्केट' (Spot Market) में बल्कि 'नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड' (NDF) मार्केट में भी देखा गया। आरबीआई ने डॉलर की सप्लाई बढ़ाकर रुपये को सहारा दिया।

  2. सरकारी बैंकों की मदद: खबर है कि सरकारी बैंकों ने भी डॉलर की भारी बिक्री की, जिससे रुपये पर दबाव कम हुआ।

  3. सट्टेबाजों पर लगाम: आरबीआई के इस कदम का उद्देश्य बाजार में चल रही एकतरफा सट्टेबाजी को रोकना और वोलैटिलिटी (Volatility) को कम करना था।

HDFC सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट, दिलीप परमार ने कहा, "लगातार पांच दिनों की गिरावट के बाद रुपये में सुधार देखा गया, जिसे केंद्रीय बैंक के संदिग्ध हस्तक्षेप से बल मिला।"

रुपया गिर क्यों रहा था? (Why was it Falling?)

भले ही आज सुधार हुआ हो, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से रुपये की हालत पस्त रही है। कोटक म्यूचुअल फंड के सीआईओ दीपक अग्रवाल और अन्य विश्लेषकों ने इसके पीछे 'बाहरी कारणों' को जिम्मेदार ठहराया है:

  • अमेरिकी टैरिफ का डर: अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर संभावित 50% टैरिफ की खबरों ने निवेशकों को डरा दिया है।

  • विदेशी निवेश की निकासी (FII Outflows): विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। मंगलवार को भी एफआईआई (FIIs) ने 2,381 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

  • व्यापार घाटा: बढ़ता हुआ व्यापार घाटा भी रुपये पर दबाव बना रहा है।

आगे क्या होगा? (Future Outlook)

विश्लेषकों का कहना है कि अभी खतरा पूरी तरह टला नहीं है। तकनीकी रूप से डॉलर/रुपये (USD/INR) की जोड़ी के लिए 90.60 पर तत्काल प्रतिरोध (Resistance) और 89.70 पर समर्थन (Support) है।

दीपक अग्रवाल ने बताया कि आरबीआई का फोकस किसी खास स्तर (जैसे 90 या 91) को बचाने पर नहीं, बल्कि बाजार की अस्थिरता (Volatility) को रोकने पर है। अगर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता (Trade Deal) हो जाता है और विदेशी निवेश वापस आता है, तो 2026 में रुपया फिर से मजबूत हो सकता है।

फिलहाल, रुपये की यह रिकवरी आम आदमी और आयातकों (Importers) के लिए थोड़ी राहत की खबर जरूर है, क्योंकि कमजोर रुपया पेट्रोल-डीजल और इलेक्ट्रॉनिक सामानों को महंगा कर देता है।