Trump vs Iran: "हम उन्हें मार गिराएंगे!" - ट्रंप की ईरान को खुली धमकी, तेहरान ने भी दिया करारा जवाब, जंग के आसार?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसने अपना मिसाइल या परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरू किया, तो उसे "मार गिराया" (Knock them down) जाएगा। इसके जवाब में ईरान ने "भयानक अंजाम" की धमकी दी है। जानें अमेरिका-ईरान के बीच दिसंबर 2025 के इस नए संकट की पूरी कहानी।
वाशिंगटन / तेहरान: साल 2025 खत्म होते-होते दुनिया एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठी नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने 'आक्रामक' अंदाज में ईरान को अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी दे दी है। फ्लोरिडा के मार-ए-लागो (Mar-a-Lago) में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अगर ईरान ने अपने बैलिस्टिक मिसाइल या परमाणु कार्यक्रम को दोबारा खड़ा करने की कोशिश की, तो अमेरिका उसे "मार गिराएगा" (Knock them down)।
ट्रंप के इस बयान ने मध्य-पूर्व (Middle East) में खलबली मचा दी है। उधर, तेहरान ने भी ईंट का जवाब पत्थर से देते हुए कहा है कि किसी भी अमेरिकी हमले का अंजाम "कल्पना से परे" होगा।
ट्रंप की चेतावनी: "हम उन्हें तहस-नहस कर देंगे"
सोमवार (29 दिसंबर) को पत्रकारों से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के गुप्त परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर चिंता जताई। खुफिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए ट्रंप ने कहा:
"अब मैं सुन रहा हूं कि ईरान फिर से (मिसाइल और परमाणु क्षमता) बनाने की कोशिश कर रहा है। अगर वे ऐसा कर रहे हैं, तो हमें उन्हें मार गिराना होगा। हम उन्हें पूरी तरह से तहस-नहस (Knock the hell out of them) कर देंगे।"
ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान ऐसी गलती नहीं कर रहा होगा, लेकिन अगर वे ऐसा करते हैं, तो अमेरिका के पास और कोई विकल्प नहीं बचेगा। यह बयान तब आया है जब नेतन्याहू ने ट्रंप को जानकारी दी कि ईरान उन पुरानी साइटों से अलग नई जगहों पर अपने हथियार डिपो और परमाणु संयंत्र बना रहा है, जिन्हें अमेरिका ने 2025 की शुरुआत में नष्ट कर दिया था।
ईरान का पलटवार: "आग से मत खेलो"
ट्रंप की इस खुली धमकी के कुछ ही घंटों बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शीर्ष सलाहकार अली शामखानी (Ali Shamkhani) ने सोशल मीडिया पर अमेरिका को चेताया।
शामखानी ने कहा:
"ईरान की मिसाइल क्षमता और रक्षा नीति किसी की अनुमति की मोहताज नहीं है। अगर हमारे खिलाफ कोई भी आक्रामकता (Aggression) दिखाई गई, तो उसका जवाब इतना सख्त और तत्काल होगा जिसकी योजना बनाने वाले (अमेरिका और इजरायल) कल्पना भी नहीं कर सकते।"
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका मिसाइल प्रोग्राम उसकी संप्रभुता (Sovereignty) का हिस्सा है और वह इसे रोकने के लिए किसी भी विदेशी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
फ्लैशबैक: 2025 में क्या हुआ था?
मौजूदा तनाव को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। उस समय ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को "पूरी तरह से मिटा" (Obliterated) दिया है।
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लेकिन ताजा खुफिया जानकारी बताती है कि ईरान ने गुप्त रूप से नई जगहों पर अपनी क्षमताएं फिर से विकसित करनी शुरू कर दी हैं।
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इसी "री-बिल्डिंग" (Rebuilding) की खबरों ने वाशिंगटन और तेल अवीव की नींद उड़ा दी है।
नेतन्याहू का 'मिशन अमेरिका'
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का यह अमेरिका दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। गाजा में युद्धविराम और हमास के खात्मे के अलावा, उनका मुख्य एजेंडा 'ईरान' ही था। इजरायल का मानना है कि अगर ईरान को अभी नहीं रोका गया, तो वह जल्द ही परमाणु बम बना लेगा जो पूरी दुनिया के लिए खतरा होगा।
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नेतन्याहू ने ट्रंप पर दबाव बनाया है कि वे ईरान के खिलाफ "अधिकतम दबाव" (Maximum Pressure) की नीति को और सख्त करें।
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ट्रंप का ताजा बयान इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
दुनिया पर क्या होगा असर?
अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधी भिड़ंत होती है, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं:
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तेल की कीमतें: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल प्राप्त करता है, जंग का अखाड़ा बन सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
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क्षेत्रीय युद्ध: इस लड़ाई में इजरायल, लेबनान (हिजबुल्लाह) और यमन (हूती विद्रोही) भी कूद सकते हैं, जिससे यह 'तीसरा विश्व युद्ध' का रूप ले सकता है।
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रूस और चीन: ईरान के समर्थन में रूस और चीन के आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जो अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती होगी।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप ने एक 'लक्ष्मण रेखा' (Red Line) खींच दी है, लेकिन ईरान इसे मानने को तैयार नहीं है। दोनों पक्षों की बयानबाजी ने कूटनीति (Diplomacy) के दरवाजे लगभग बंद कर दिए हैं। अब सवाल यह है कि क्या दुनिया 2026 की शुरुआत एक नए और विनाशकारी युद्ध के साथ करेगी? सबकी निगाहें अब व्हाइट हाउस और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं।