Tuljabhavani Temple: अब देवी मां के चरणों में चढ़ाए फूलों से महकेंगे घर, तुलजाभवानी मंदिर में मिलेगी 'ईको-फ्रेंडली' अगरबत्ती

महाराष्ट्र के प्रसिद्ध तुलजाभवानी मंदिर (Tuljapur) में अब भक्तों को मंदिर के फूलों (निर्माल्य) से बनी ईको-फ्रेंडली अगरबत्ती प्रसादी के रूप में मिलेगी। मंदिर संस्थान और SIDBI की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रोजगार भी देगी। पढ़ें पूरी खबर।

Dec 30, 2025 - 20:24
Dec 30, 2025 - 20:28
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Tuljabhavani Temple: अब देवी मां के चरणों में चढ़ाए फूलों से महकेंगे घर, तुलजाभवानी मंदिर में मिलेगी 'ईको-फ्रेंडली' अगरबत्ती
आस्था और पर्यावरण का अनूठा संगम: तुलजाभवानी मंदिर में अब 'निर्माल्य' से बनेगी अगरबत्ती, भक्तों को मिलेगी खुशबूदार सौगात

तुलजापुर / धाराशिव (उस्मानाबाद): महाराष्ट्र की कुलस्वामिनी और लाखों भक्तों की श्रद्धा का केंद्र तुलजाभवानी मंदिर (Tuljabhavani Temple) ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब देवी मां के चरणों में अर्पित किए जाने वाले हजारों टन फूल (निर्माल्य) कचरे में नहीं जाएंगे, बल्कि उनसे 'ईको-फ्रेंडली' अगरबत्ती (Eco-friendly Incense Sticks) तैयार की जाएगी, जो भक्तों के घरों को महकाएगी।

मंदिर संस्थान और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) के बीच हुए एक समझौते के तहत इस नई पहल की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य मंदिर परिसर को स्वच्छ रखना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना है।

क्या है 'निर्माल्य' प्रोजेक्ट?

तुलजाभवानी मंदिर में हर रोज, और विशेषकर नवरात्रि व पूर्णिमा जैसे अवसरों पर, भक्त भारी मात्रा में फूल, हार और बेलपत्र चढ़ाते हैं। इन चढ़े हुए फूलों को 'निर्माल्य' कहा जाता है। अब तक इनका निपटान एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब इसका सदुपयोग होगा।

  1. फूलों की रीसाइकिलिंग: मंदिर से निकलने वाले सूखे और ताजे फूलों को इकट्ठा किया जाएगा।

  2. अगरबत्ती निर्माण: इन फूलों को प्रोसेस करके, सुखाकर और पीसकर पाउडर बनाया जाएगा, जिससे बिना चारकोल वाली (Charcoal-free) और रसायनों से मुक्त (Chemical-free) अगरबत्ती बनाई जाएगी।

  3. प्रसादी: यह अगरबत्ती भक्तों को मंदिर परिसर में प्रसाद के रूप में या किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी।

SIDBI के साथ हुई साझेदारी

इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए SIDBI (Small Industries Development Bank of India) आगे आया है।

  • सिडबी इस परियोजना के लिए मशीनरी और तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।

  • मंदिर प्रशासन ने इसके लिए जगह और कच्चा माल (फूल) उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ली है।

  • इस पहल का शुभारंभ हाल ही में जिला कलेक्टर और मंदिर संस्थान के अध्यक्ष द्वारा किया गया।

महिलाओं को मिलेगा रोजगार

यह परियोजना सिर्फ पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण के लिए भी महत्वपूर्ण है। अगरबत्ती निर्माण इकाई में स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) की महिलाओं को काम दिया जाएगा। इससे उन्हें सम्मानजनक आजीविका मिलेगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

अन्य मंदिरों की राह पर तुलजापुर

इससे पहले शिरडी के साईं बाबा मंदिर और मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में भी इसी तरह के प्रयोग सफल रहे हैं। अब तुलजापुर में भी 'कचरे से कंचन' (Waste to Wealth) की यह अवधारणा साकार होगी।

प्रशासन का कहना है कि इससे मंदिर परिसर में गंदगी कम होगी, जल प्रदूषण रुकेगा (क्योंकि अक्सर निर्माल्य पानी में बहा दिया जाता था) और भक्तों को एक पवित्र और शुद्ध उत्पाद मिलेगा।

निष्कर्ष

तुलजाभवानी मंदिर की यह पहल धर्म और विज्ञान का एक सुंदर उदाहरण है। जब भक्त यह अगरबत्ती जलाएंगे, तो उन्हें न केवल सुगंध मिलेगी, बल्कि यह संतोष भी होगा कि वे पर्यावरण को बचाने में योगदान दे रहे हैं। आने वाले समय में यह मॉडल मराठवाड़ा के अन्य प्रमुख मंदिरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।