Sambhajinagar Crime Report 2025: शहर में मर्डर हुए कम, लेकिन अपराध का ग्राफ अभी भी चिंताजनक; पुलिस कमिश्नर ने बताया 'ड्रग्स' का कनेक्शन
छत्रपति संभाजीनगर पुलिस ने 2025 की क्राइम रिपोर्ट जारी की है। पुलिस कमिश्नर प्रवीण पवार ने बताया कि ड्रग्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई से हत्या के मामलों में भारी कमी आई है, लेकिन रेप और डकैती जैसे अपराध बढ़े हैं। जानें शहर का पूरा 'क्राइम रिपोर्ट कार्ड'।
छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): साल 2025 का अंत होते-होते छत्रपति संभाजीनगर पुलिस (Chhatrapati Sambhajinagar Police) ने अपना वार्षिक 'रिपोर्ट कार्ड' जनता के सामने रखा है। शहर के पुलिस कमिश्नर (CP) प्रवीण पवार (Pravin Pawar) ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपराध के आंकड़े जारी किए, जो शहर की सुरक्षा व्यवस्था की एक मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं।
पुलिस के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर यह रही कि शहर में हत्या (Murder) की वारदातों में उल्लेखनीय कमी आई है। सीपी पवार ने इसका सीधा श्रेय पुलिस द्वारा ड्रग्स और नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए गए "वॉर ऑन ड्रग्स" (War on Drugs) अभियान को दिया है। हालांकि, हत्या के प्रयास, रेप और छेड़छाड़ जैसे मामलों में हुई बढ़ोतरी ने पुलिस के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
हत्या के मामलों में भारी गिरावट: 15 जानें बचीं
पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में शहर में हत्या के कुल 28 मामले दर्ज किए गए।
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तुलना: यह आंकड़ा 2024 के मुकाबले काफी बेहतर है। पिछले साल की तुलना में इस साल 15 कम हत्याएं हुई हैं।
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सफलता: पुलिस के लिए संतोष की बात यह है कि 2025 में दर्ज हुए सभी 28 हत्या के मामलों को सुलझा लिया गया (100% Detection Rate) है। कोई भी मामला अनसुलझा नहीं रहा।
ड्रग्स का 'बैकबोन' तोड़ा, इसलिए कम हुए मर्डर
सीपी प्रवीण पवार ने हत्याओं में कमी का सीधा कनेक्शन 'नशाखोरी' से जोड़ा। उन्होंने कहा:
"हमने अपनी जांच में पाया कि गंभीर अपराधों और हत्याओं के पीछे अक्सर नशा (Substance Abuse) एक बड़ा कारण होता था। एक बार जब यह लिंक स्थापित हो गया, तो हमने शहर में चल रहे ड्रग नेटवर्क की कमर तोड़ने (Break the Backbone) का फैसला किया।"
नशे के खिलाफ कार्रवाई के आंकड़े:
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NDPS केस: इस साल पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत 289 मामले दर्ज किए। यह 2024 में दर्ज 142 मामलों की तुलना में 209% की भारी वृद्धि है।
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गिरफ्तारी: पुलिस ने नशा तस्करी में शामिल 312 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
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जब्ती: स्थानीय और अंतरराज्यीय तस्करों से लगभग 3.3 करोड़ रुपये कीमत का गांजा, एमडी (MD Drugs), नशीली गोलियां और कफ सिरप जब्त किया गया।
डीसीपी (क्राइम) रत्नाकर नवले ने कहा कि इस सख्त कार्रवाई का असर पड़ोसी राज्यों तक हुआ है। अब तस्कर संभाजीनगर में माल भेजने से पहले सौ बार सोचते हैं।
चिंता का विषय: अन्य गंभीर अपराधों में उछाल
जहां एक तरफ हत्या के मामले कम हुए, वहीं दूसरी तरफ अन्य हिंसक अपराधों का ग्राफ ऊपर गया है, जो शहरवासियों के लिए चिंता का विषय है।
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हत्या का प्रयास (Attempt to Murder): इस साल 134 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल से 25 ज्यादा हैं। गनीमत रही कि पुलिस ने इनमें से 132 मामले सुलझा लिए।
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लूट/रॉबरी (Robbery): राह चलते लोगों से लूटपाट के 192 मामले सामने आए, जिनमें पिछले साल के मुकाबले 17 मामलों की वृद्धि हुई है।
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महिलाओं के खिलाफ अपराध: यह सबसे संवेदनशील मुद्दा है।
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रेप (Rape): रेप के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। इस साल 155 केस दर्ज हुए (पिछले साल से 6 ज्यादा)। अच्छी बात यह है कि सभी मामलों में आरोपी पकड़े गए।
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छेड़छाड़ (Molestation): विनयभंग के 399 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल से 10 अधिक हैं।
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हालांकि, डकैती (Dacoity) के मामलों में राहत मिली है। इस साल डकैती के 12 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल से 4 कम हैं।
'धिंड' पैटर्न और सख्त कानून
संभाजीनगर पुलिस इस साल अपने विवादास्पद 'धिंड' (Dhind) पैटर्न के लिए चर्चा में रही, जिसमें पुलिस ने आदतन अपराधियों और ड्रग तस्करों का शहर में सार्वजनिक जुलूस निकाला।
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पुलिस का तर्क है कि इससे अपराधियों का 'खौफ' खत्म होता है और जनता में विश्वास बढ़ता है।
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इसके अलावा, पुलिस ने मकोका (MCOCA) के तहत 7 मामलों में 48 आरोपियों पर कार्रवाई की और 7 खतरनाक अपराधियों को एमपीडीए (MPDA) के तहत जेल भेजा।
चुनौती: सजा की कम दर (Conviction Rate)
क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर गजानन कल्याणकर ने स्वीकार किया कि भले ही पुलिस अपराध सुलझाने (Detection) में अच्छा काम कर रही है, लेकिन अदालत में सजा दिलाने (Conviction) की दर अभी भी कम है।
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जिला अदालत में सजा की दर लगभग 10% है।
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प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट अदालतों में यह मात्र 5% है। यह पुलिस और अभियोजन पक्ष (Prosecution) के लिए आत्मचिंतन का विषय है।
निष्कर्ष
साल 2025 संभाजीनगर पुलिस के लिए "मिश्रित परिणामों" वाला साल रहा। ड्रग्स के खिलाफ उनकी "जीरो टॉलरेंस" नीति ने निश्चित रूप से हत्या जैसे जघन्य अपराधों को रोका है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। लेकिन सड़क पर होने वाली लूटपाट और महिलाओं की सुरक्षा अभी भी ऐसे मोर्चे हैं जहां पुलिस को 2026 में और अधिक मुस्तैदी दिखानी होगी।
अस्वीकरण: यह लेख टाइम्स ऑफ इंडिया की 31 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट और पुलिस कमिश्नर की प्रेस कॉन्फ्रेंस के आंकड़ों पर आधारित है।