Sunetra Pawar Power: अजित पवार ने खेला बड़ा दांव! पत्नी सुनेत्रा पवार बनीं पुणे और बीड की नई 'पालकमंत्री', सियासत में बड़ा कद

महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फेरबदल करते हुए राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को पुणे और बीड जिले का पालकमंत्री (Guardian Minister) नियुक्त किया है। अजित पवार के गढ़ पुणे की कमान अब उनकी पत्नी के हाथ में है। जानें इस फैसले के सियासी मायने।

Feb 5, 2026 - 17:57
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Sunetra Pawar Power: अजित पवार ने खेला बड़ा दांव! पत्नी सुनेत्रा पवार बनीं पुणे और बीड की नई 'पालकमंत्री', सियासत में बड़ा कद
संसद में संग्राम: कांग्रेस ने 2005 का वीडियो शेयर कर पूछा- 'कहां है वो हिम्मत?' मनमोहन सिंह की आड़ में मोदी सरकार पर वार

नई दिल्ली: देश की संसद (Parliament) में पिछले कई दिनों से कामकाज ठप है। विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, सरकार से अडाणी समूह और अन्य आर्थिक मुद्दों पर चर्चा की मांग पर अड़ा है, जबकि सरकार विपक्ष पर सदन को बंधक बनाने का आरोप लगा रही है। इस सियासी रस्साकशी के बीच, कांग्रेस ने गुरुवार को अपने तरकश से एक पुराना तीर निकाला है।

पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) का 2005 का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इस वीडियो के जरिए कांग्रेस ने मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए यह दिखाने की कोशिश की है कि एक "सच्चा नेता" सदन में बहस से भागता नहीं है।

क्या है उस 2005 के वीडियो में?

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश (Jairam Ramesh) द्वारा साझा किए गए इस 21 साल पुराने वीडियो में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राज्यसभा में बोलते हुए दिखाई दे रहे हैं। उस समय विपक्ष (भाजपा) किसी मुद्दे पर सदन में हंगामा कर रहा था।

वीडियो में डॉ. सिंह पूरे आत्मविश्वास के साथ कहते हैं:

"मैं और मेरी सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने से नहीं डरते। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। अगर विपक्ष चाहे तो अभी अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) ला सकता है, हम उसका सामना करने के लिए तैयार हैं। लेकिन सदन को चलने दीजिए।"

कांग्रेस का तर्क है कि जिसे भाजपा "मौनी बाबा" (Silent PM) कहती थी, वह सदन में खड़े होकर सवालों का सामना करने की हिम्मत रखता था, जबकि आज के "वाचाल" (बोलने वाले) प्रधानमंत्री सवालों से भाग रहे हैं।

कांग्रेस का वार: "शेर की दहाड़ बनाम चुप्पी"

इस वीडियो को शेयर करते हुए कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर एक तीखा अभियान छेड़ दिया है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है:

  1. बहस से परहेज क्यों? कांग्रेस ने सवाल उठाया कि 2005 में मनमोहन सिंह विपक्ष की हर चुनौती स्वीकार करते थे, लेकिन आज 2026 में प्रधानमंत्री मोदी संसद में आकर अडाणी या संभल जैसे ज्वलंत मुद्दों पर जवाब क्यों नहीं देते?

  2. JPC की मांग: विपक्ष लगातार इन मुद्दों पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के गठन की मांग कर रहा है, जिसे सरकार द्वारा बार-बार खारिज किया जा रहा है।

  3. तुलना: कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "इतिहास गवाह है कि मनमोहन सिंह जी शालीनता से जवाब देते थे, वे सदन से भागते नहीं थे। आज 56 इंच का सीना सवालों के आगे खामोश क्यों है?"

सरकार का पलटवार: "इतिहास न सिखाएं"

कांग्रेस के इस हमले पर सत्ता पक्ष (NDA) ने भी पलटवार किया है। संसदीय कार्य मंत्री और भाजपा प्रवक्ताओं ने कांग्रेस को उनका "आपातकाल" और यूपीए के दौरान हुए घोटाले याद दिलाए।

  • भाजपा का कहना है कि कांग्रेस संसद के नियमों का पालन नहीं कर रही है।

  • सरकार का तर्क है कि वे चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष चर्चा के बजाय सिर्फ हंगामा (Ruckus) करना चाहता है ताकि देश का विकास कार्य रुक जाए।

  • एक भाजपा नेता ने कहा, "मनमोहन सिंह जी की मजबूरी हम सब जानते हैं, उन्हें रिमोट कंट्रोल से चलाया जाता था। आज देश के पास एक निर्णायक नेतृत्व है।"

संसद में क्यों है गतिरोध? (Why is Parliament Stalled?)

मौजूदा सत्र (संभवतः बजट या शीतकालीन सत्र का हिस्सा) शुरू होने के बाद से ही लोकसभा और राज्यसभा में कामकाज न के बराबर हुआ है।

  • मुख्य मुद्दा: अमेरिकी अभियोजकों द्वारा गौतम अडाणी पर लगाए गए रिश्वतखोरी के आरोपों के बाद विपक्ष एकजुट होकर JPC जांच की मांग कर रहा है।

  • संभल हिंसा: उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विपक्ष गृह मंत्री से बयान की मांग कर रहा है।

  • इन मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पा रही है, जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित (Adjourned) हो रही है।

निष्कर्ष

2005 के वीडियो के जरिए कांग्रेस ने न केवल अपनी पुरानी लीडरशिप का बचाव किया है, बल्कि भाजपा के "मजबूत नेता" वाले नैरेटिव पर चोट करने की कोशिश की है। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अब देखना यह है कि क्या मनमोहन सिंह की यह "पुरानी आवाज" आज की संसद में चल रहे शोर को शांत कर पाएगी या गतिरोध ऐसे ही जारी रहेगा।