India-US Trade Deal 2026: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में किसानों की जीत! कृषि और डेयरी सेक्टर को मिली 'ढाल', हफ्तों में हो सकता है बड़ा ऐलान
भारत और अमेरिका एक बड़े 'व्यापार समझौते' (Trade Pact) के करीब हैं, लेकिन भारत ने अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने में सफलता हासिल की है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पुष्टि की है कि संवेदनशील क्षेत्रों को इस डील से बाहर रखा गया है। जानें क्या है पूरी खबर।
वाशिंगटन / नई दिल्ली: दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं—भारत और अमेरिका—जल्द ही एक ऐतिहासिक व्यापारिक साझेदारी पर मुहर लगा सकती हैं। लेकिन इस बड़े समझौते से पहले भारत के करोड़ों किसानों और पशुपालकों के लिए वाशिंगटन से एक राहत भरी खबर आई है। भारत सरकार ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि अमेरिकी कंपनियों को भारत के कृषि (Agriculture) और डेयरी (Dairy) बाजारों में खुली छूट नहीं दी जाएगी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता (Trade Pact) अगले कुछ हफ्तों में फाइनल हो सकता है, लेकिन भारत ने अपनी "संवेदनशील" लाल रेखाएं (Red Lines) खींच दी हैं।
क्या है मामला? (The Core Issue)
अमेरिका लंबे समय से भारत पर दबाव बना रहा था कि वह अपने डेयरी और कृषि बाजारों को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोले।
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अमेरिका की मांग: अमेरिका चाहता था कि भारत अमेरिकी दूध, पनीर, चिकन (चिकन लेग्स) और अन्य कृषि उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क (Import Duty) को कम करे या खत्म करे।
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भारत का डर: भारत में डेयरी और खेती करोड़ों छोटे किसानों की आजीविका है। अगर अमेरिकी कंपनियों के सस्ते और मशीनीकृत उत्पाद भारतीय बाजार में बाढ़ की तरह आ जाते, तो हमारे छोटे किसानों और अमूल (Amul) जैसी सहकारी समितियों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता था।
पीयूष गोयल ने खींची 'लक्ष्मण रेखा'
अमेरिका दौरे पर गए केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ अपनी बातचीत में भारत का रुख साफ कर दिया है।
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एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, "बातचीत बहुत अच्छी रही है और समझौता लगभग तैयार है। लेकिन कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को 'शील्ड' (सुरक्षा कवच) कर दिया गया है। इन पर कोई समझौता नहीं होगा।"
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इसका मतलब है कि भारत अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुका है और उसने अपने घरेलू उत्पादकों के हितों को सर्वोपरि रखा है।
समझौते में क्या शामिल होगा? (What's in the Deal?)
अगर कृषि और डेयरी बाहर हैं, तो फिर समझौता किस पर हो रहा है? सूत्रों के मुताबिक, यह एक 'मिनी ट्रेड डील' (Mini Trade Deal) हो सकती है, जो चुनिंदा क्षेत्रों पर केंद्रित होगी:
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जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP): भारत चाहता है कि अमेरिका GSP का दर्जा बहाल करे, जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में शुल्क मुक्त प्रवेश मिलता था। (इसे ट्रंप प्रशासन ने रद्द कर दिया था)।
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हाई-टेक ट्रेड: दोनों देश सेमीकंडक्टर, स्पेस टेक्नोलॉजी और डिफेंस के क्षेत्र में व्यापार बाधाओं को कम करने पर सहमत हो सकते हैं।
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मेडिकल डिवाइसेज: अमेरिका अपने मेडिकल उपकरणों (जैसे स्टेंट और घुटने के प्रत्यारोपण) के लिए भारत में बेहतर बाजार पहुंच चाहता है, जिस पर सहमति बन सकती है।
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फल और मेवे: भारत अमेरिकी बादाम, अखरोट और सेब पर कुछ शुल्क कम कर सकता है, जिसके बदले में भारतीय आम और अनार को अमेरिकी बाजार में आसान एंट्री मिलेगी।
ट्रंप और मोदी की 'केमिस्ट्री'
यह संभावित समझौता ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का प्रशासन वापस आ चुका है और भारत में पीएम मोदी का तीसरा कार्यकाल चल रहा है।
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पीयूष गोयल की अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) और वाणिज्य सचिव के साथ मैराथन बैठकें हुई हैं।
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दोनों पक्ष चाहते हैं कि पीएम मोदी की संभावित अमेरिका यात्रा या किसी बड़े द्विपक्षीय मंच पर इस डील का ऐलान किया जाए।
चुनौतियां अभी बाकी हैं
हालांकि अधिकारी कह रहे हैं कि समझौता "हफ्तों" में हो सकता है, लेकिन कुछ पेंच अभी भी फंसे हैं।
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श्रम और पर्यावरण मानक: अमेरिका चाहता है कि व्यापार समझौतों में श्रम कानूनों और पर्यावरण मानकों को भी जोड़ा जाए, जिसका भारत विरोध करता रहा है क्योंकि इससे भारतीय उत्पादों की लागत बढ़ सकती है।
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डिजिटल टैक्स: बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों (गूगल, फेसबुक) पर भारत द्वारा लगाए जाने वाले डिजिटल टैक्स को लेकर भी मतभेद हैं।
निष्कर्ष
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, अगर होता है, तो यह दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक नया अध्याय होगा। लेकिन सबसे बड़ी जीत यह है कि भारत ने 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत अपने किसानों के हितों की रक्षा की है। अमूल के दूध और भारतीय किसान की मेहनत को अमेरिकी कॉरपोरेट से बचाकर सरकार ने एक कड़ा संदेश दिया है—व्यापार जरूरी है, लेकिन आजीविका की कीमत पर नहीं। अब सबकी निगाहें आने वाले हफ्तों पर टिकी हैं कि इस डील का अंतिम मसौदा कैसा दिखता है।