HSC परीक्षा 2026: नकल रोकने में लापरवाही पड़ी तो शिक्षकों पर गिरेगी गाज; संभाजीनगर बोर्ड ने तैयार किया 'एक्शन प्लान'

छत्रपति संभाजीनगर बोर्ड ने 12वीं (HSC) की परीक्षा के लिए 'नकल मुक्त' अभियान को और सख्त कर दिया है। अगर परीक्षा केंद्र पर नकल पकड़ी गई, तो अब सिर्फ छात्र नहीं, बल्कि वहां मौजूद शिक्षकों और केंद्र संचालकों पर भी पुलिस केस (FIR) दर्ज होगा। जानें नए नियम।

Feb 9, 2026 - 19:58
Feb 10, 2026 - 22:42
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HSC परीक्षा 2026: नकल रोकने में लापरवाही पड़ी तो शिक्षकों पर गिरेगी गाज; संभाजीनगर बोर्ड ने तैयार किया 'एक्शन प्लान'
HSC परीक्षा 2026: नकल रोकने में लापरवाही पड़ी तो शिक्षकों पर गिरेगी गाज; संभाजीनगर बोर्ड ने तैयार किया 'एक्शन प्लान'

छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (MSBSHSE) की 12वीं (HSC) की परीक्षाएं सिर पर हैं। ऐसे में छत्रपति संभाजीनगर विभागीय बोर्ड ने नकल माफिया और लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ कमर कस ली है। इस बार बोर्ड ने साफ कर दिया है कि "नकल मुक्त अभियान" (Copy-Free Campaign) सिर्फ एक नारा नहीं होगा, बल्कि इसे सख्ती से लागू किया जाएगा।

बोर्ड ने एक कड़ा संदेश जारी करते हुए कहा है कि अगर किसी परीक्षा केंद्र पर छात्र नकल करते पकड़े गए, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी वहां तैनात पर्यवेक्षकों (Invigilators) और केंद्र संचालकों (Centre Heads) की होगी। दोषी पाए जाने पर अब शिक्षकों के खिलाफ भी आपराधिक मामला (FIR) दर्ज किया जाएगा।

छात्रों के साथ स्टाफ भी नपेगा

अब तक नकल के मामलों में अक्सर छात्रों को ही सजा मिलती थी (जैसे पेपर रद्द होना या रस्टीकेट होना)। लेकिन बोर्ड ने पाया है कि कई बार परीक्षा केंद्र का स्टाफ नकल कराने में मदद करता है या जानबूझकर अनदेखी करता है।

  • सख्त कार्रवाई: यदि किसी क्लासरूम में सामूहिक नकल (Mass Copying) होती है, तो वहां मौजूद शिक्षक को 'महाराष्ट्र प्रिवेंशन ऑफ मालप्रैक्टिस एक्ट, 1982' के तहत आरोपी बनाया जाएगा।

  • निलंबन: पुलिस केस के अलावा, संबंधित शिक्षक या कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच और निलंबन (Suspension) की कार्रवाई भी की जाएगी।

परीक्षा केंद्रों पर किलेबंदी

संभाजीनगर विभाग में परीक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है।

  1. उड़न दस्ते (Flying Squads): राजस्व विभाग, पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की विशेष टीमें अचानक केंद्रों का दौरा करेंगी। किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा।

  2. CCTV की नजर: संवेदनशील (Sensitive) और अति-संवेदनशील केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। वीडियो फुटेज की जांच कभी भी की जा सकती है।

  3. धारा 144: परीक्षा केंद्रों के 100 मीटर के दायरे में धारा 144 लागू रहेगी। भीड़ जमा करने वालों पर पुलिस लाठीचार्ज या गिरफ्तारी कर सकती है।

  4. जेरॉक्स दुकानें बंद: परीक्षा के समय केंद्रों के आसपास की फोटोकॉपी (Xerox) की दुकानें बंद रखने का आदेश दिया गया है।

प्रश्न पत्र की सुरक्षा

पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए, प्रश्न पत्रों को कस्टडी से परीक्षा हॉल तक जीपीएस (GPS) लगे वाहनों में ले जाया जाएगा। पैकेट को छात्रों के सामने ही खोला जाएगा और उसका वीडियो रिकॉर्ड किया जाएगा ताकि कोई छेड़छाड़ न हो सके।

बोर्ड की अपील

विभागीय बोर्ड के सचिव ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और ईमानदारी से परीक्षा दें। उन्होंने चेतावनी दी कि एक छोटी सी गलती (नकल) छात्र का पूरा साल और भविष्य बर्बाद कर सकती है, और अब तो यह शिक्षकों की नौकरी भी खा सकती है।

निष्कर्ष: छत्रपति संभाजीनगर बोर्ड का यह कदम उन मेहनती छात्रों के लिए राहत की खबर है जो ईमानदारी से पढ़ाई करते हैं। शिक्षकों और स्टाफ की जवाबदेही तय होने से उम्मीद है कि इस साल 12वीं की परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और नकल-मुक्त होगी।