Historic Moment: अब कश्मीरी भाषा में भी उपलब्ध है 'भारत का संविधान', पीएम मोदी ने की तारीफ, बताया लोकतंत्र की जीत
भारत के इतिहास में पहली बार संविधान का अनुवाद कश्मीरी भाषा (Kashmiri Language) में किया गया है। पीएम मोदी ने 'मन की बात' में इस उपलब्धि की सराहना की। जानें कौन हैं इसके अनुवादक शब्बीर मुजाहिद और क्यों है यह जम्मू-कश्मीर के लिए गर्व का पल।
लोकतंत्र का नया अध्याय: 75 साल बाद पहली बार 'कश्मीरी' भाषा में अनुवादित हुआ भारत का संविधान, पीएम मोदी ने बताया 'ऐतिहासिक'
नई दिल्ली / श्रीनगर: भारत का संविधान (Constitution of India) सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा है। 26 जनवरी 1950 को लागू हुए इस संविधान ने हमें अधिकार और कर्तव्य दिए। लेकिन सात दशक से भी अधिक समय बीत जाने के बाद, अब जाकर जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी मातृभाषा में इस पवित्र ग्रंथ को पढ़ने का सौभाग्य मिला है।
एक ऐतिहासिक पहल के तहत, भारत के संविधान का पहली बार कश्मीरी भाषा (Kashmiri Language) में अनुवाद किया गया है। इस उपलब्धि की गूंज रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' (Mann Ki Baat) के 117वें एपिसोड में भी सुनाई दी, जहां उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर के लिए एक "विशाल उपलब्धि" करार दिया।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इस प्रयास की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह अनुवाद न केवल भाषा के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह सामान्य नागरिकों को कानून और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में भी मदद करेगा।
पीएम मोदी ने कहा:
"हमारा संविधान हमारी सबसे बड़ी ताकत है। जब यह हमारी अपनी भाषा में उपलब्ध होता है, तो इससे हमारा जुड़ाव और गहरा हो जाता है। कश्मीरी अनुवाद के जरिए अब घाटी के लोग, विशेषकर युवा और छात्र, संविधान की बारीकियों को अपनी जुबान में समझ सकेंगे।"
कौन हैं इस ऐतिहासिक कार्य के नायक?
इस भगीरथ प्रयास के पीछे श्रीनगर के रहने वाले एक समर्पित व्यक्ति, शब्बीर अहमद मुजाहिद (Shabir Ahmed Mujahid) का हाथ है।
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शब्बीर मुजाहिद ने कड़ी मेहनत और लगन से संविधान के जटिल कानूनी शब्दों का कश्मीरी में अनुवाद किया है।
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यह कार्य आसान नहीं था क्योंकि संविधान की शब्दावली (Legal Terminology) बेहद तकनीकी होती है, और उसे कश्मीरी जैसी साहित्यिक भाषा में ढालना, बिना उसके मूल अर्थ को खोए, एक बड़ी चुनौती थी।
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पीएम मोदी ने शब्बीर मुजाहिद के इस प्रयास को "प्रेरणादायक" बताते हुए उन्हें बधाई दी।
'नस्तालिक' लिपि में लोकतंत्र की इबारत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह अनुवाद कश्मीरी भाषा की पारंपरिक 'नस्तालिक' (Nastaliq) लिपि में किया गया है, जो जम्मू-कश्मीर में व्यापक रूप से पढ़ी और लिखी जाती है।
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अब तक, संविधान हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध था, लेकिन कश्मीरी संस्करण की कमी हमेशा खलती थी।
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इस अनुवाद में संविधान की प्रस्तावना (Preamble), मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य और राज्य के नीति निदेशक तत्वों को बहुत ही सरल कश्मीरी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
क्यों खास है यह अनुवाद?
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कानूनी जागरूकता: जम्मू-कश्मीर के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले कई लोग, जो अंग्रेजी या हिंदी में सहज नहीं हैं, अब अपने अधिकारों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
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सांस्कृतिक गौरव: कश्मीरी भाषा को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किया गया है, लेकिन इसमें संविधान का अनुवाद न होना एक विडंबना थी। यह अनुवाद कश्मीरी अस्मिता और भारतीय लोकतंत्र के बीच के रिश्ते को मजबूत करेगा।
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न्याय तक पहुंच: वकीलों, छात्रों और आम वादियों के लिए अब कानूनी प्रक्रियाओं को समझना आसान होगा।
संथाली और डोगरी के बाद कश्मीरी की बारी
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में यह भी याद दिलाया कि हाल के वर्षों में संविधान को देश की हर कोने तक पहुंचाने के प्रयास तेज हुए हैं।
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इससे पहले संथाली (Santhali) भाषा में संविधान का अनुवाद किया गया था, जिसकी काफी सराहना हुई थी।
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जम्मू क्षेत्र की डोगरी (Dogri) भाषा में भी संविधान उपलब्ध कराया गया है।
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अब कश्मीरी अनुवाद के साथ, 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का सपना और साकार हुआ है।
निष्कर्ष
भारत के संविधान का कश्मीरी में अनुवाद होना सिर्फ एक भाषाई घटना नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक और राजनीतिक संदेश भी है। यह बताता है कि लोकतंत्र की जड़ें अब कश्मीर की वादियों में और गहरी हो रही हैं। जब एक कश्मीरी नागरिक अपनी ही भाषा में "हम भारत के लोग..." (We the People of India) पढ़ेगा, तो उस जुड़ाव की बात ही कुछ और होगी। शब्बीर मुजाहिद का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अनमोल उपहार है।