Homi Bhabha and AI: 1955 का वो फार्मूला जो आज AI की रेस में भारत को बना सकता है सुपरपावर
होमी भाभा ने 1955 में परमाणु तकनीक के लिए जो रणनीति अपनाई थी, वही आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए जरूरी है। जानिए 'कोल्ड वॉर' और 'AI वॉर' के बीच की समानताएं और भारत के लिए जरूरी सबक।
नई दिल्ली: इतिहास खुद को दोहराता है। 1955 में दुनिया 'परमाणु ऊर्जा' (Nuclear Energy) के लिए लड़ रही थी, और आज 2026 में लड़ाई 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) के लिए हो रही है। उस समय भारत का नेतृत्व डॉ. होमी जहांगीर भाभा (Homi J. Bhabha) कर रहे थे, और उन्होंने जो रास्ता दिखाया, वह आज के डिजिटल युग में भारत के लिए एक 'संजीवनी' साबित हो सकता है।
हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, 1955 के जिनेवा सम्मेलन (Geneva Conference) और आज के हालातों में गहरा संबंध है। आइए समझते हैं कि भाभा की रणनीति से आज हम क्या सीख सकते हैं।
1955 का सबक: मदद लो, पर गुलाम मत बनो
1950 के दशक में अमेरिका ने "शांति के लिए परमाणु" (Atoms for Peace) का नारा दिया था। वे भारत जैसे देशों को तकनीक देने को तैयार थे, लेकिन अपनी शर्तों पर। वे चाहते थे कि भारत सिर्फ उनका 'ग्राहक' बना रहे।
भाभा की दूरदर्शिता: होमी भाभा ने साफ कर दिया था कि भारत तकनीक लेगा, लेकिन निर्भर नहीं रहेगा।
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उन्होंने थोरियम (Thorium) पर आधारित भारत का अपना परमाणु कार्यक्रम बनाया।
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उन्होंने कहा कि अगर हम ईंधन (Fuel) के लिए विदेश पर निर्भर रहे, तो हमारी आजादी खतरे में पड़ जाएगी।
2026 की चुनौती: 'डेटा कॉलोनियलिज्म' का खतरा
आज स्थिति बिल्कुल वैसी ही है। गूगल, ओपनएआई (OpenAI) और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियां कह रही हैं कि "हम आपको दुनिया का सबसे बेहतरीन AI देंगे।" लेकिन खतरा यह है कि अगर हम सिर्फ उनका AI इस्तेमाल करेंगे, तो हमारा डेटा उनके पास जाएगा और हम डिजिटल रूप से उनके गुलाम (Digital Colony) बन जाएंगे।
भारत के लिए क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)
1. सिर्फ 'यूज़र' (User) मत बनो, 'मालिक' बनो
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सबक: भाभा ने सिर्फ बिजली नहीं मांगी, उन्होंने बिजली बनाने वाला रिएक्टर खुद बनाने की ठानी।
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AI रणनीति: भारत को सिर्फ ChatGPT का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हमें 'भारतजीपीटी' या अपना खुद का ** सॉवरेन एआई (Sovereign AI)** मॉडल बनाना होगा जो भारतीय भाषाओं को समझ सके।
2. अपना इंफ्रास्ट्रक्चर खुद बनाओ (Compute Capacity)
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सबक: परमाणु भट्टी के बिना सिद्धांत बेकार थे।
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AI रणनीति: AI के लिए 'जीपीयू' (GPU) चिप्स वही हैं जो परमाणु कार्यक्रम के लिए 'यूरेनियम' था। भारत सरकार को अपने सुपरकंप्यूटर और डेटा सेंटर बनाने होंगे ताकि भारतीय स्टार्टअप्स को विदेशी सर्वर पर निर्भर न रहना पड़े।
3. 'ब्लैक बॉक्स' तकनीक से बचो
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सबक: भाभा ने पूरी प्रक्रिया (Fuel Cycle) पर नियंत्रण रखा।
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AI रणनीति: हमें ऐसी विदेशी AI तकनीक को स्वीकार नहीं करना चाहिए जिसके काम करने का तरीका (Algorithm) हमें पता न हो। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। पारदर्शी और 'ओपन सोर्स' AI ही भारत का रास्ता होना चाहिए।
4. गुटनिरपेक्षता (Non-Alignment) का फायदा उठाओ
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सबक: भाभा ने अमेरिका, रूस और कनाडा—सबसे मदद ली, लेकिन किसी एक गुट में शामिल नहीं हुए।
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AI रणनीति: भारत को अमेरिका के साथ सेमीकंडक्टर पर काम करना चाहिए, लेकिन साथ ही अपनी खुद की चिप मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना चाहिए।
निष्कर्ष: होमी भाभा ने 1955 में जिनेवा सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए दुनिया को दिखाया था कि एक विकासशील देश भी विज्ञान में महाशक्ति बन सकता है। आज भारत के पास AI मिशन के जरिए वही इतिहास दोहराने का मौका है। जरूरत है तो बस भाभा जैसी 'आत्मनिर्भर' सोच की।