Maharashtra Nagaradhyaksha Result: MIM की जोरदार एंट्री, 10 Muslim Candidates बने नगराध्यक्ष | AIMIM Wins in Karanja Lad
महाराष्ट्र नगराध्यक्ष चुनाव परिणामों में महायुति का दबदबा रहा, लेकिन AIMIM ने करंजा लाड में जीत दर्ज कर अपना खाता खोला। जानिए उन 10 मुस्लिम उम्मीदवारों के बारे में जिन्होंने नगराध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। (Maharashtra Municipal Council Election Results 2024 analysis).
मुंबई/औरंगाबाद: महाराष्ट्र की राजनीति में स्थानीय निकाय चुनावों (Local Body Elections) का अपना एक अलग महत्व है। हाल ही में हुए नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के परिणामों ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली महायुति (Mahayuti) ने प्रचंड बहुमत के साथ अपना दबदबा कायम रखा है, वहीं दूसरी ओर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी 'ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन' (AIMIM) ने भी जोरदार एंट्री मारी है। इन चुनावों की सबसे खास बात यह रही कि राज्य भर में कुल 10 मुस्लिम उम्मीदवारों ने नगराध्यक्ष (Municipal Council President) पद पर जीत हासिल की है, जो बदलते राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करता है।
महायुति की आंधी में भी MIM का उदय
महाराष्ट्र के इन चुनाव परिणामों में सबसे ज्यादा चर्चा AIMIM के प्रदर्शन की हो रही है। पार्टी ने राज्य में नगराध्यक्ष पद के लिए अपना खाता खोलने में सफलता प्राप्त की है। विदर्भ के वाशिम जिले की करंजा लाड (Karanja Lad) नगर परिषद में AIMIM की उम्मीदवार फरीदा बानो यूसुफ पुंजानी ने शानदार जीत दर्ज की है। यह जीत पार्टी के लिए संजीवनी बूटी की तरह है, क्योंकि इससे पार्टी को विदर्भ जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी पैठ बनाने का मौका मिला है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत आने वाले महानगर पालिका चुनावों में AIMIM के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेगी।
10 मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीता जनता का भरोसा
इन चुनावों में न केवल एआईएमआईएम, बल्कि अन्य दलों से भी मुस्लिम उम्मीदवारों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। राज्य भर के अलग-अलग जिलों से कुल 10 मुस्लिम उम्मीदवार नगराध्यक्ष बनने में सफल रहे हैं। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर जनता ने विकास और व्यक्तिगत छवि को प्राथमिकता दी है।
विजयी मुस्लिम नगराध्यक्षों की सूची:
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करंजा लाड (वाशिम): फरीदा बानो यूसुफ पुंजानी (AIMIM) – यहाँ पार्टी ने अपनी ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
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सिल्लोड (छत्रपति संभाजीनगर): अब्दुल समीर अब्दुल सत्तार – राज्य के कद्दावर मंत्री अब्दुल सत्तार के बेटे अब्दुल समीर ने अपने पिता के गढ़ में वर्चस्व कायम रखा है। उनकी जीत ने यह साबित कर दिया कि सिल्लोड में सत्तार परिवार की पकड़ अभी भी मजबूत है।
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खुलताबाद: आमेर पटेल – धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण खुलताबाद में आमेर पटेल ने जनता का विश्वास जीता।
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कन्नड़: शेख फरहीन जावेद शेख – कन्नड़ नगर परिषद में महिला नेतृत्व के रूप में शेख फरहीन ने बाजी मारी।
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भोकरदन: समरीन मिर्जा – भोकरदन, जो कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है, वहां भी मुस्लिम उम्मीदवार की जीत चर्चा का विषय है।
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पाथरी: आसेफ खान – परभणी जिले के पाथरी में आसेफ खान ने नगराध्यक्ष पद पर कब्जा किया।
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माजलगाव (बीड): मेहरीन बिलाल चाऊस – बीड जिले की राजनीति में इस जीत के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
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बालापुर (अकोला): डॉ. आफरीन – एक शिक्षित उम्मीदवार के रूप में डॉ. आफरीन की जीत ने मतदाताओं की जागरूकता का परिचय दिया है।
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औसा (धाराशिव/उस्मानाबाद): शेख परवीन – औसा में शेख परवीन की जीत ने क्षेत्र में नए समीकरण बना दिए हैं।
इन परिणामों से स्पष्ट है कि मराठवाड़ा और विदर्भ के क्षेत्रों में मुस्लिम नेतृत्व को स्थानीय स्तर पर स्वीकार्यता मिल रही है।
महायुति बनाम महाविकास आघाड़ी: कौन किस पर भारी?
अगर हम पूरे राज्य के आंकड़ों पर नजर डालें, तो महायुति ने विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया है। आंकड़ों के अनुसार, महायुति गठबंधन के कुल 224 नगराध्यक्ष चुनकर आए हैं, जबकि महाविकास आघाड़ी (MVA) को महज 50 सीटों पर संतोष करना पड़ा है।
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भारतीय जनता पार्टी (BJP): 120 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यह आंकड़ा बताता है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में भाजपा का संगठन मजबूत है।
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शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट): मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 58 सीटों पर जीत हासिल कर यह साबित कर दिया कि असली शिवसेना का जनाधार उनके साथ है।
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राकांपा (अजित पवार गुट): 37 सीटों के साथ अजित पवार की पार्टी तीसरे नंबर पर रही।
दूसरी तरफ, विपक्ष की स्थिति चिंताजनक रही:
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कांग्रेस: 31 सीटें।
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शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे): 10 सीटें।
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राकांपा (शरदचंद्र पवार): 10 सीटें।
भविष्य के संकेत: इम्तियाज जलील की रणनीति
इन परिणामों के बाद, एआईएमआईएम के पूर्व सांसद और कद्दावर नेता इम्तियाज जलील ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने संकेत दिया है कि आने वाले महानगर पालिका चुनावों (Municipal Corporation Elections) में पार्टी पूरी ताकत से लड़ेगी। जलील ने कहा कि अगर सम्मानजनक गठबंधन का प्रस्ताव मिलता है तो वे विचार कर सकते हैं, अन्यथा पार्टी 'एकला चलो' की राह पर चलकर किंगमेकर की भूमिका निभाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मुकाबला सीधे तौर पर सांप्रदायिक ताकतों से है और वे दलित-मुस्लिम एकता के समीकरण पर काम करेंगे।
महाराष्ट्र के नगर परिषद चुनाव परिणाम कई मायनों में ऐतिहासिक रहे हैं। जहां भाजपा ने अपनी सर्वोच्चता सिद्ध की है, वहीं AIMIM द्वारा खाता खोलना और 10 मुस्लिम उम्मीदवारों का जीतना यह बताता है कि राज्य की राजनीति में विविधता के लिए अभी भी जगह है। करंजा लाड की जीत ने ओवैसी की पार्टी को विदर्भ में पैर जमाने का मौका दे दिया है, जिसका असर आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीतियों पर देखने को मिल सकता है। सिल्लोड में अब्दुल सत्तार के बेटे की जीत और अन्य क्षेत्रों में मुस्लिम महिलाओं का नगराध्यक्ष बनना महिला सशक्तिकरण और dynastic politics (वंशवाद) की मिश्रित तस्वीर पेश करता है। अब सभी की निगाहें आगामी महानगर पालिका चुनावों पर टिकी हैं, जहां असली 'महासंग्राम' देखने को मिलेगा।