Marathwada Civic Poll Results: धनंजय मुंडे की दमदार वापसी, अशोक चव्हाण को झटका; जानें मराठवाड़ा के निकाय चुनाव का पूरा हाल1

महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव (2025) के नतीजों में मराठवाड़ा में बड़ा उलटफेर। परली में धनंजय मुंडे ने शानदार जीत के साथ 'पावर' दिखाई, तो नांदेड़ में अशोक चव्हाण का जादू फीका पड़ा। पढ़ें बीड़, नांदेड़ और छत्रपति संभाजीनगर का पूरा चुनावी विश्लेषण।

Dec 22, 2025 - 21:38
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छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों (Local Body Polls 2025) के नतीजों ने मराठवाड़ा की राजनीति में नई लकीर खींच दी है। रविवार को घोषित हुए परिणामों ने जहां कुछ दिग्गजों को राहत की सांस दी, वहीं कुछ कद्दावर नेताओं के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।

विशेष रूप से मराठवाड़ा क्षेत्र में, यह चुनाव अजित पवार गुट के एनसीपी नेता धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) के लिए 'रेडेम्पशन' (Redemption) यानी अपनी खोई हुई साख वापस पाने का जरिया बना, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता अशोक चव्हाण (Ashok Chavan) को अपने ही गढ़ नांदेड़ में कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा।

आइए विस्तार से जानते हैं कि मराठवाड़ा के किस जिले में किसका पलड़ा भारी रहा और इन नतीजों के क्या सियासी मायने हैं।

परली में धनंजय मुंडे की 'दमदार' वापसी

बीड़ जिले की परली नगर परिषद (Parli Municipal Council) का चुनाव इस बार पूरे राज्य के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ था। विवादों के चलते मंत्री पद छोड़ने के बाद धनंजय मुंडे के लिए यह पहला बड़ा चुनावी इम्तेहान था।

  • नतीजे: एनसीपी (अजित पवार) और भाजपा गठबंधन ने परली की 35 में से 25 सीटों पर कब्जा जमाया। इतना ही नहीं, नगर परिषद अध्यक्ष का पद भी एनसीपी के खाते में गया।

  • मुंडे का बयान: इस जीत से गदगद धनंजय मुंडे ने विरोधियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "यह जीत उन लोगों के गाल पर तमाचा है जिन्होंने मेरे शहर और मुझे बदनाम करने की कोशिश की। जनता ने विपक्ष को उनकी औकात दिखा दी है।"

  • दोहरी खुशी: धनंजय मुंडे के लिए खुशी दोगुनी रही क्योंकि परभणी के गंगाखेड़ (Gangakhed) में उनकी बहन उर्मिला केंद्रे (Urmila Kendre) ने भी नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव जीत लिया। विपक्ष ने यहां मुंडे के खिलाफ निजी हमले किए थे, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया।

पंकजा मुंडे का भी रहा जलवा

बीड़ जिले में मुंडे परिवार का दबदबा कायम रहा। भाजपा नेता और कैबिनेट मंत्री पंकजा मुंडे (Pankaja Munde) के नेतृत्व में पार्टी ने गेवराई (Georai) और अंबाजोगाई (Ambajogai) में शानदार प्रदर्शन किया।

  • बीड़ नगर परिषद में भाजपा ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 15 सीटें जीतीं, हालांकि वे अध्यक्ष पद से मामूली अंतर से चूक गए।

नांदेड़: अशोक चव्हाण के लिए 'आत्मचिंतन' का समय

दूसरी तरफ, नांदेड़ जिले के नतीजे भाजपा और पूर्व सीएम अशोक चव्हाण के लिए निराशाजनक रहे। लोकसभा उपचुनाव में हार के बाद अशोक चव्हाण पर पार्टी को स्थानीय निकायों में जीत दिलाने का भारी दबाव था, लेकिन वे उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए।

  • लोहा में 'फैमिली पैक' हुआ फेल: नांदेड़ की लोहा (Loha) नगर परिषद में भाजपा ने एक अजीबोगरीब दांव खेला था, जिसे सोशल मीडिया पर 'फैमिली पैक' कहा जा रहा था। यहां भाजपा ने एक ही परिवार (गजानन सूर्यवंशी) के 6 सदस्यों को टिकट दिया था। जनता ने इस परिवारवाद को पूरी तरह नकार दिया और सभी 6 उम्मीदवार (अध्यक्ष पद के उम्मीदवार सहित) हार गए। यहां अजित पवार की एनसीपी ने बाजी मारी।

  • चव्हाण की प्रतिक्रिया: नतीजों के बाद अशोक चव्हाण ने माना कि "समन्वय की कमी" (Lack of Coordination) रही। हालांकि, भाजपा ने भोकर, कुंडलवाड़ी और मुदखेड़ में जीत दर्ज की, लेकिन जिले पर चव्हाण की पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है।

छत्रपति संभाजीनगर: मिश्रित परिणाम

जिले में भाजपा के लिए राह आसान नहीं रही। गंगापुर से भाजपा विधायक प्रशांत बंब और फुलंब्री से अनुराधा चव्हाण चुनावों में कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए।

  • शिंदे गुट को राहत: सिल्लोड में मंत्री अब्दुल सत्तार (Abdul Sattar) और पैठण में संदीपन भूमरे (Sandeep Bhumare) अपनी-अपनी नगर परिषदों पर कब्जा जमाने में कामयाब रहे।

  • कुल मिलाकर, जिले की 7 परिषदों में से शिवसेना (शिंदे) और कांग्रेस ने 2-2 सीटें जीतीं, जबकि एनसीपी, भाजपा और शिवसेना (UBT) को 1-1 सीट मिली।

हिंगोली और लातूर का हाल

  • हिंगोली: यहां शिवसेना (शिंदे गुट) के फायरब्रैंड विधायक संतोष बांगर (Santosh Bangar) का जादू चला। हिंगोली और कलमनूरी दोनों जगहों पर उनकी पार्टी ने जीत हासिल की। हिंगोली नगर परिषद अध्यक्ष पद पर उनकी भाभी रेखा बांगर काबिज हुईं।

  • लातूर: भाजपा के लिए यहां अच्छी खबर रही। पार्टी ने 4 नगर परिषद अध्यक्ष पद जीते। वहीं, औसा (Ausa) में एनसीपी ने जीत दर्ज की, जो भाजपा विधायक अभिमन्यु पवार का निर्वाचन क्षेत्र है।

निष्कर्ष: महायुति का 'महायज्ञ' सफल?

मराठवाड़ा के इन नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि लोकसभा चुनाव के बाद बनी 'महायुति' (भाजपा + शिवसेना शिंदे + एनसीपी अजित पवार) का प्रयोग ग्रामीण इलाकों में सफल हो रहा है।

  1. धनंजय मुंडे ने साबित कर दिया है कि वे अभी भी मराठवाड़ा की राजनीति के बड़े खिलाड़ी हैं।

  2. अशोक चव्हाण को अपनी रणनीति बदलनी होगी, क्योंकि भाजपा में आने के बाद भी उनका पुराना किला दरक रहा है।

  3. आगामी 2026 के महानगर पालिका चुनावों से पहले यह जीत सत्ताधारी गठबंधन के लिए 'बूस्टर डोज़' का काम करेगी।