Sambhajinagar Miracle: कभी दफ्तर में लगाती थीं झाड़ू, अब उसी मनपा में बनीं 'नगरसेवक'; लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीर

छत्रपति संभाजीनगर में लोकतंत्र की जीत! एक महिला जो कभी महानगरपालिका में सफाई कर्मचारी थीं, उन्होंने 2026 के चुनाव में जीत हासिल की है। अब वे उसी इमारत में फैसले लेने के लिए बैठेंगी जहां वे कभी झाड़ू लगाती थीं। पढ़ें यह प्रेरणादायक कहानी।

Feb 6, 2026 - 19:28
Feb 6, 2026 - 19:30
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Sambhajinagar Miracle: कभी दफ्तर में लगाती थीं झाड़ू, अब उसी मनपा में बनीं 'नगरसेवक'; लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीर
फर्श से अर्श तक: संभाजीनगर मनपा में कभी लगाती थीं झाड़ू, आज उसी सदन में गूंजेगी उनकी आवाज; पूर्व सफाई कर्मचारी बनीं 'नगरसेवक'

छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): कहते हैं वक्त का पहिया जब घूमता है, तो राजा को रंक और रंक को राजा बना देता है। भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती शुक्रवार को छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (CSMC) में देखने को मिली, जहां एक ऐसी महिला चुनाव जीतकर पहुंचीं, जिनका इस इमारत से रिश्ता बहुत पुराना है—लेकिन अब उनका 'रुतबा' बदल गया है।

साल 2026 के मनपा चुनाव के नतीजों ने सबको चौंका दिया है। एक पूर्व महिला सफाई कर्मचारी (Sweeper), जिन्होंने अपनी जवानी के कई साल मनपा मुख्यालय के फर्श को चमकाने में गुजार दिए, अब उसी मुख्यालय में एक निर्वाचित नगरसेवक (Corporator) के रूप में लौटी हैं।

कल हाथ में झाड़ू थी, आज हाथ में 'पावर' है

इस जीत ने पूरे शहर को भावुक कर दिया है। नवनिर्वाचित नगरसेवक ने कई वर्षों तक मनपा में कॉन्ट्रैक्ट पर सफाई कर्मचारी के रूप में काम किया।

  • वे अधिकारियों के आने से पहले दफ्तर साफ करती थीं और जनरल बॉडी मीटिंग हॉल (सभागृह) में कुर्सियां जमाती थीं।

  • आज, जनता ने उन्हें उसी सभागृह में बैठने का अधिकार दिया है, जहां कभी उन्हें प्रवेश करने से पहले सोचना पड़ता था।

जीत के बाद उन्होंने कहा:

"मैंने इन गलियारों की धूल साफ की है। मुझे पता है कि सिस्टम में कहां गंदगी है। पहले मैं झाड़ू से सफाई करती थी, अब मैं अपनी कलम और फैसलों से शहर की गंदगी साफ करूंगी।"

संघर्ष भरा रहा सफर

उनका यह सफर आसान नहीं था। कम वेतन और ठेकेदारी प्रथा के शोषण को उन्होंने करीब से देखा है।

  • नौकरी छोड़ने के बाद, उन्होंने अपनी बस्ती और साथी कर्मचारियों की आवाज उठानी शुरू की।

  • चुनाव में उनके पास बड़े नेताओं जैसा पैसा नहीं था, लेकिन उनके पास 'जनता का विश्वास' था। उन्होंने घर-घर जाकर प्रचार किया और लोगों को बताया कि एक एसी (AC) कमरे में बैठने वाले नेता से बेहतर वह नेता हो सकता है जिसने खुद सड़कों पर पसीना बहाया हो।

मुख्यालय में हुआ भावुक स्वागत

शुक्रवार को जब वे प्रमाण पत्र लेने मनपा कार्यालय पहुंचीं, तो वहां का नजारा देखने लायक था।

  • वहां मौजूद चपरासी, सुरक्षा गार्ड और सफाई कर्मचारियों ने उन्हें घेर लिया।

  • अपने बीच की एक महिला को 'साहब' की कुर्सी पर जाते देख कई कर्मचारियों की आंखों में आंसू आ गए। यह जीत सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि हर उस कर्मचारी की है जो सम्मान की रोटी कमाता है।

प्राथमिकताएं तय

नवनिर्वाचित नगरसेवक ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका मुख्य एजेंडा क्या होगा:

  1. सफाई कर्मचारियों का सम्मान: वे कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को पक्का करने और उन्हें समय पर वेतन दिलाने के लिए लड़ेंगी।

  2. स्लम विकास: जिन बस्तियों में सीवेज और पानी की समस्या है, उसे दूर करना उनकी प्राथमिकता होगी।

निष्कर्ष

छत्रपति संभाजीनगर की यह कहानी साबित करती है कि लोकतंत्र में एक आम इंसान भी खास बन सकता है। यह घटना उन सभी आलोचकों के लिए जवाब है जो कहते हैं कि राजनीति सिर्फ अमीरों का खेल है। आज संभाजीनगर की 'झाड़ू वाली ताई' ने साबित कर दिया है कि सेवा का जज्बा हो, तो फर्श से अर्श तक का सफर तय किया जा सकता है।