India Defense Deal: चीन की चाल होगी नाकाम! भारत लीज पर लेगा 2 और घातक 'प्रिडेटर' ड्रोन, 1600 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए अमेरिका से 2 और MQ-9B 'सी गार्डियन' ड्रोन लीज पर लेने को मंजूरी दे दी है। 1600 करोड़ रुपये का यह सौदा हिंद महासागर और सीमाओं पर निगरानी को मजबूत करेगा। जानें क्या है भारत की रणनीति।

Dec 30, 2025 - 21:16
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India Defense Deal: चीन की चाल होगी नाकाम! भारत लीज पर लेगा 2 और घातक 'प्रिडेटर' ड्रोन, 1600 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी
आसमान से दुश्मन पर 'तीसरी आंख': भारत ने अमेरिका से 2 और 'प्रिडेटर' ड्रोन लीज पर लेने का किया फैसला, 1600 करोड़ मंजूर

नई दिल्ली: हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों और सीमा पार से पाकिस्तान की नापाक हरकतों के बीच, भारत सरकार ने अपनी रक्षा तैयारियों को और धार देने का फैसला किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में एक अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत, भारत अमेरिका से दो और MQ-9B 'सी गार्डियन' (SeaGuardian) ड्रोन लीज (Lease) पर लेगा।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत पहले से ही अमेरिका के साथ 31 प्रीडेटर ड्रोन की एक बड़ी मेगा डील (Mega Deal) पर हस्ताक्षर करने के करीब है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह लीज डील क्यों महत्वपूर्ण है और इससे भारत की सुरक्षा कैसे मजबूत होगी।

क्या है 1600 करोड़ की यह डील?

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, डीएसी ने लगभग 1600 करोड़ रुपये की लागत से दो MQ-9B हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) ड्रोन को लीज पर लेने की अनुमति दी है।

  • कंपनी: ये ड्रोन अमेरिका की रक्षा कंपनी जनरल एटॉमिक्स (General Atomics) से लिए जाएंगे।

  • किसके लिए: ये विशेष रूप से भारतीय नौसेना (Indian Navy) के लिए होंगे, जो पहले से ही ऐसे दो ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रही है।

  • अंतरिम उपाय: यह लीज एक 'स्टॉप-गैप' व्यवस्था (Interim Measure) है। चूंकि 31 ड्रोन्स की मुख्य डील के तहत डिलीवरी शुरू होने में अभी 2-3 साल का समय लग सकता है, इसलिए नौसेना अपनी निगरानी क्षमताओं में कोई कमी नहीं आने देना चाहती।

पुराने ड्रोन्स की लीज हो रही थी खत्म

गौर करने वाली बात यह है कि 2020 में लद्दाख में चीन के साथ हुए गतिरोध (Galwan Clash) के बाद, नौसेना ने आपातकालीन शक्तियों के तहत अमेरिका से दो MQ-9B 'सी गार्डियन' ड्रोन लीज पर लिए थे।

  • इन ड्रोन्स ने पिछले चार वर्षों में 16,000 घंटे से अधिक की उड़ान भरी है और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) से लेकर हिमालय की चोटियों तक बेजोड़ निगरानी की है।

  • इनकी लीज की अवधि जल्द ही खत्म होने वाली थी। ऐसे में, निगरानी तंत्र को बनाए रखने के लिए डीएसी ने नई लीज को मंजूरी दी है ताकि पुराने ड्रोन्स को नए लीज्ड ड्रोन्स से बदला जा सके या अनुबंध बढ़ाया जा सके।

दुश्मन का काल: क्यों खास हैं ये 'प्रिडेटर' ड्रोन?

MQ-9B ड्रोन को दुनिया का सबसे घातक और भरोसेमंद मानवरहित विमान (UAV) माना जाता है। इसे 'हंटर-किलर' (Hunter-Killer) भी कहा जाता है।

  1. लंबी उड़ान: यह ड्रोन लगातार 35 से 40 घंटे तक हवा में रह सकता है।

  2. ऊंचाई: यह 40,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर उड़कर दुश्मन की हर हरकत पर नजर रख सकता है।

  3. सटीक हमला: निगरानी के अलावा, यह लेजर-गाइडेड मिसाइलों और स्मार्ट बमों से लैस होकर पिन-पॉइंट स्ट्राइक (Surgical Strike) करने में सक्षम है (हालांकि लीज वाले ड्रोन मुख्य रूप से निगरानी के लिए हैं, लेकिन मुख्य डील में हथियारों से लैस ड्रोन आएंगे)।

  4. समुद्री सुरक्षा: इसके पास ऐसे रडार और सेंसर हैं जो समुद्र की गहराइयों में छिपी पनडुब्बियों को भी डिटेक्ट कर सकते हैं।

बड़ी तस्वीर: 31 ड्रोन्स की 'मेगा डील'

यह लीज डील उस बड़े समझौते का हिस्सा नहीं है, जिसे अक्टूबर 2024 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने मंजूरी दी थी, बल्कि यह उसके आने तक का एक सहारा है। भारत अमेरिका से कुल 31 MQ-9B ड्रोन खरीदने वाला है, जिसकी कीमत लगभग 3.9 बिलियन डॉलर (करीब 32,000 करोड़ रुपये) है।

इस मेगा डील का बंटवारा इस प्रकार होगा:

  • भारतीय नौसेना: 15 'सी गार्डियन' ड्रोन।

  • भारतीय सेना: 8 'स्काई गार्डियन' ड्रोन।

  • भारतीय वायु सेना: 8 'स्काई गार्डियन' ड्रोन।

उम्मीद की जा रही है कि इस मेगा डील पर अनुबंध (Contract) पर हस्ताक्षर अगले कुछ महीनों में हो जाएंगे, जिसके बाद डिलीवरी शुरू होने में 3 से 4 साल लग सकते हैं। यही वजह है कि नौसेना ने बीच के समय के लिए 'लीज' का रास्ता चुना है।

चीन-पाकिस्तान पर पैनी नजर

भारत के लिए ये ड्रोन रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं।

  • हिंद महासागर: चीन अपनी नौसेना (PLA Navy) की मौजूदगी हिंद महासागर में बढ़ा रहा है। ये ड्रोन मलक्का स्ट्रेट से लेकर अदन की खाड़ी तक चौबीसों घंटे निगरानी कर सकते हैं।

  • सीमा सुरक्षा: लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश की दुर्गम पहाड़ियों में, जहां सैनिकों का हर समय गश्त करना मुश्किल है, वहां ये ड्रोन आसमान से 'तीसरी आंख' का काम करेंगे।

निष्कर्ष

1600 करोड़ रुपये की यह मंजूरी बताती है कि भारत अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहता। लीज पर लिए गए ये दो ड्रोन यह सुनिश्चित करेंगे कि जब तक भारत का अपना बड़ा बेड़ा तैयार नहीं होता, तब तक हिंद महासागर और सीमाओं पर हमारी पकड़ कमजोर न पड़े। यह कदम 'आत्मनिर्भर भारत' के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में भारत-अमेरिका की बढ़ती साझेदारी का भी प्रमाण है।