Sambhajinagar BJP News: गोविंद केंद्रे बने मनपा में बीजेपी के गटनेता; मेयर पद पर सस्पेंस बरकरार
छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका में बीजेपी ने गोविंद केंद्रे (Govind Kendre) को अपना गटनेता नियुक्त किया है। कैबिनेट मंत्री अतुल सावे ने उन्हें 'निष्ठावान कार्यकर्ता' बताया। मेयर और डिप्टी मेयर के नामों पर अभी भी सस्पेंस है। जानें पूरी खबर।
छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (CSMC) में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सदन में अपने नेतृत्व की घोषणा कर दी है। पार्टी ने गुरुवार को गोविंद केंद्रे (Govind Kendre) को महानगरपालिका में अपना गटनेता (Group Leader) नियुक्त किया है।
इस नियुक्ति के साथ ही बीजेपी ने अपने 57 नगरसेवकों की कमान एक ऐसे चेहरे को सौंपी है जो पहली बार चुनकर आए हैं, लेकिन जिनका परिवार राजनीति में सक्रिय रहा है।
कौन हैं गोविंद केंद्रे?
गोविंद केंद्रे ओबीसी (OBC) वर्ग से आते हैं और पार्टी के एक पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ता माने जाते हैं।
-
राजनीतिक सफर: यह पहली बार है जब गोविंद केंद्रे खुद नगरसेवक (Corporator) के रूप में चुने गए हैं। इससे पहले, मनपा के पिछले कार्यकाल में उनकी पत्नी नगरसेवक रह चुकी हैं।
-
औपचारिकताएं पूरी: नियुक्ति की घोषणा के बाद, केंद्रे ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और नवनिर्वाचित नगरसेवकों के साथ जाकर संभाजीनगर के विभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner) के कार्यालय में जरूरी कागजी कार्यवाही पूरी की।
अतुल सावे ने जताया भरोसा
स्थानीय विधायक और राज्य के कैबिनेट मंत्री अतुल सावे (Atul Save) ने गोविंद केंद्रे की नियुक्ति पर खुशी जताई है।
अतुल सावे ने कहा, "गोविंद केंद्रे पार्टी के 'राष्ट्र प्रथम' सिद्धांत के प्रति समर्पित एक निष्ठावान कार्यकर्ता हैं। हमें पूरा विश्वास है कि उनके नेतृत्व में बीजेपी के सभी नगरसेवक शहर में सुशासन और कुशल प्रबंधन के लिए काम करेंगे और भगवा ध्वज का मान बढ़ाएंगे।"
मेयर और डिप्टी मेयर पर सस्पेंस
भले ही गटनेता का नाम तय हो गया हो, लेकिन शहर का महापौर (Mayor) और उप-महापौर (Deputy Mayor) कौन होगा, इस पर बीजेपी ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं।
-
आंकड़ों का खेल: 115 सीटों वाली महानगरपालिका में बीजेपी ने 57 सीटें जीती हैं, जो बहुमत के जादुई आंकड़े से सिर्फ 1 कम है।
-
रणनीति: गुरुवार रात तक पार्टी ने मेयर पद के उम्मीदवार की घोषणा नहीं की थी। माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान जातीय समीकरणों और अनुभव को ध्यान में रखकर ही अंतिम फैसला लेगा।
निष्कर्ष: गोविंद केंद्रे की नियुक्ति के साथ बीजेपी ने संकेत दिया है कि वह जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका देने में विश्वास रखती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि मेयर चुनाव में पार्टी किसे आगे करती है और क्या वह निर्दलीय या अन्य दलों के समर्थन से अपना बोर्ड बनाने में सफल होती है।