Sambhajinagar School Crisis: शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल! पिछले 2 सालों में बंद हुए मनपा के 20 स्कूल, भविष्य खतरे में
छत्रपति संभाजीनगर में महानगरपालिका (CSMC) के 20 स्कूल पिछले दो वर्षों में बंद हो गए हैं। कम होती छात्र संख्या और गिरते शिक्षा स्तर ने अभिभावकों और शिक्षाविदों की चिंता बढ़ा दी है। जानें क्या है जमीनी हकीकत और प्रशासन का तर्क।
छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): एक तरफ जहाँ सरकार "पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया" का नारा देती है, वहीं महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों में से एक, छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर में महानगरपालिका (Civic-run) द्वारा संचालित स्कूलों की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है।
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले दो वर्षों के भीतर छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (CSMC) के लगभग 20 स्कूलों पर ताला लग चुका है। स्कूलों के इस तरह धड़ाधड़ बंद होने से न केवल शहर की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि गरीब तबके के बच्चों के भविष्य पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
आंकड़े क्या कहते हैं? (The Alarming Statistics)
प्रशासनिक आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति भयावह है। शहर में मनपा द्वारा संचालित स्कूलों की संख्या में भारी गिरावट आई है।
-
बंद हुए स्कूल: पिछले 24 महीनों में करीब 20 स्कूल बंद कर दिए गए हैं।
-
कारण: प्रशासन का कहना है कि इन स्कूलों में छात्रों की संख्या (Enrollment) या तो शून्य हो गई थी या इतनी कम थी कि स्कूल चलाना संभव नहीं था।
-
मर्जर की प्रक्रिया: जिन स्कूलों को बंद किया गया, वहां बचे-कुचे छात्रों को पास के दूसरे मनपा स्कूलों में स्थानांतरित (Merge) कर दिया गया है।
क्यों वीरान हो रहे हैं सरकारी स्कूल?
आखिर क्या वजह है कि जिन स्कूलों में कभी बच्चों का शोर गूंजता था, वहां आज सन्नाटा पसरा है? इसके पीछे कई प्रमुख कारण माने जा रहे हैं:
-
निजी स्कूलों का बढ़ता प्रभाव (Private School Dominance): शहर में गली-गली में खुल रहे अंग्रेजी माध्यम (English Medium) के निजी स्कूलों ने अभिभावकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। गरीब से गरीब अभिभावक भी अब अपने बच्चे को सरकारी स्कूल के बजाय प्राइवेट स्कूल में भेजना चाहता है, भले ही इसके लिए उसे कर्ज क्यों न लेना पड़े।
-
बुनियादी सुविधाओं का अभाव (Lack of Infrastructure): मनपा के कई स्कूलों की इमारतें जर्जर अवस्था में हैं। पीने का साफ पानी, स्वच्छ शौचालय और आधुनिक क्लासरूम की कमी के कारण माता-पिता इन स्कूलों से दूर हो रहे हैं।
-
शिक्षा की गुणवत्ता (Quality of Education): शिक्षकों की कमी और आधुनिक शिक्षण विधियों (Digital Learning) का अभाव भी एक बड़ा कारण है। जहाँ प्राइवेट स्कूलों में स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब हैं, वहीं मनपा के कई स्कूलों में ब्लैकबोर्ड तक ठीक हालत में नहीं हैं।
-
माध्यम की समस्या: ज्यादातर बंद होने वाले स्कूल मराठी या उर्दू माध्यम के हैं। आज के दौर में अंग्रेजी माध्यम की मांग बढ़ने के कारण क्षेत्रीय भाषा के स्कूलों में छात्रों की संख्या घट रही है।
शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की चिंता
इस मुद्दे पर शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षा क्षेत्र के जानकारों ने गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि 'शिक्षा का अधिकार' (RTE) कानून के तहत हर बच्चे को उसके घर के पास शिक्षा मिलना उसका हक है।
-
गरीबों पर मार: ये स्कूल बंद होने से सबसे ज्यादा नुकसान दिहाड़ी मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों का हो रहा है। अगर स्कूल दूर होगा, तो कई बच्चे पढ़ाई छोड़ देंगे (Drop-out), जिससे बाल श्रम जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
-
प्रशासन की नाकामी: आलोचकों का कहना है कि प्रशासन स्कूलों को बेहतर बनाने के बजाय उन्हें बंद करने का आसान रास्ता चुन रहा है। अगर समय रहते इन स्कूलों को 'सेमी-इंग्लिश' या 'मॉडल स्कूल' में बदला जाता, तो शायद यह नौबत नहीं आती।
दिल्ली मॉडल से क्यों नहीं ले रहे सीख?
विशेषज्ञों का कहना है कि संभाजीनगर प्रशासन को दिल्ली या मुंबई के सरकारी स्कूलों के मॉडल से सीख लेनी चाहिए।
-
दिल्ली में सरकारी स्कूलों का कायाकल्प किया गया, जिससे वहां प्राइवेट स्कूलों से बच्चे सरकारी स्कूलों में वापस आए।
-
मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने भी अपने स्कूलों को CBSE और ICSE बोर्ड से जोड़कर उन्हें पुनर्जीवित किया है।
-
संभाजीनगर में भी अगर 'इंग्लिश मीडियम' मनपा स्कूल और 'दिल्ली मॉडल' जैसी सुविधाएं दी जाएं, तो छात्र संख्या फिर से बढ़ सकती है।
प्रशासन का पक्ष
महानगरपालिका के अधिकारियों का तर्क है कि वे संसाधनों का सही उपयोग करने के लिए कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद या मर्ज कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिन स्कूलों में 5-10 बच्चे हैं, वहां पूरा स्टाफ रखना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है। प्रशासन का दावा है कि वे बंद हुए स्कूलों के छात्रों को पास के बेहतर स्कूलों में शिफ्ट कर रहे हैं ताकि उनकी पढ़ाई का नुकसान न हो।
निष्कर्ष: अभी नहीं चेते तो...
छत्रपति संभाजीनगर एक ऐतिहासिक और औद्योगिक शहर है। ऐसे शहर में 20 सरकारी स्कूलों का बंद होना एक 'वेक-अप कॉल' (Wake-up call) है। अगर प्रशासन ने जल्द ही शिक्षा के बजट में बढ़ोतरी नहीं की और स्कूलों को आधुनिक बनाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में मनपा के स्कूल सिर्फ इतिहास के पन्नों में रह जाएंगे।
जरूरत है कि सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर इन मंदिरों को वीरान होने से बचाएं।