VB-G RAM G Bill Passed: अब MGNREGA हुआ इतिहास! लोकसभा में 'विकसित भारत गारंटी' बिल पास, जानें क्या है खास

लोकसभा ने 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)' (VB-G RAM G) बिल पारित कर दिया है। यह मनरेगा (MGNREGA) की जगह लेगा और ग्रामीणों को 125 दिन के रोजगार की गारंटी देगा। जानें इसके फायदे और विवाद।

Dec 18, 2025 - 21:25
Dec 18, 2025 - 21:36
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VB-G RAM G Bill Passed: अब MGNREGA हुआ इतिहास! लोकसभा में 'विकसित भारत गारंटी' बिल पास, जानें क्या है खास
MGNREGA का युग समाप्त? लोकसभा में भारी हंगामे के बीच पास हुआ 'VB-G RAM G' बिल, जानें ग्रामीणों के लिए क्या बदला

नई दिल्ली: गुरुवार को भारतीय संसद के इतिहास में एक बड़ा बदलाव दर्ज किया गया। भारी विरोध और नारेबाजी के बीच लोकसभा ने 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)' विधेयक (Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission - Gramin) पारित कर दिया है। इसे संक्षेप में VB-G RAM G बिल कहा जा रहा है।

यह नया कानून पिछले 20 वर्षों से चल रहे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लेगा। सरकार का दावा है कि यह बिल 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करेगा, जबकि विपक्ष ने इसे गांधीजी की विरासत पर हमला बताया है।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस बिल में क्या खास है और इसे लेकर इतना हंगामा क्यों हो रहा है।

क्या है VB-G RAM G बिल? (Key Features)

केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बिल को पेश करते हुए इसे ग्रामीण भारत की तकदीर बदलने वाला कदम बताया। इसके मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:

  1. 125 दिनों की रोजगार गारंटी: जहां मनरेगा में साल भर में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी, वहीं इस नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम (Unskilled Manual Work) की वैधानिक गारंटी दी जाएगी।

  2. नाम में बदलाव: इस योजना का नाम अब महात्मा गांधी के नाम पर नहीं, बल्कि 'विकसित भारत' और 'राम' (रोजगार और आजीविका मिशन) के नाम पर होगा।

  3. राज्यों की भूमिका: कानून लागू होने के 6 महीने के भीतर राज्य सरकारों को नई योजनाओं का ढांचा तैयार करना होगा।

  4. भ्रष्टाचार पर लगाम: सरकार का कहना है कि मनरेगा में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार था ("गड्ढा खोदो और भर दो"), जिसे यह नया कानून रोकेगा। भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि नए कानून में 'राम' का नाम जुड़ने से भ्रष्टाचार कम होगा।

संसद में क्यों मचा बवाल? (Why the Ruckus?)

बिल पेश होते ही विपक्षी दलों ने संसद में जोरदार हंगामा किया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस के सांसदों ने इसे "जन-विरोधी" और "संविधान-विरोधी" करार दिया।

  • गांधीजी का नाम हटाने पर आपत्ति: टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि सरकार महात्मा गांधी की विरासत को मिटाना चाहती है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण भारत को सुरक्षा दी थी, लेकिन सरकार इसे खत्म कर रही है।

  • 'राम' नाम पर राजनीति: विपक्ष का कहना है कि योजना के नाम में 'RAM' (Rozgar and Ajeevika Mission) का प्रयोग जानबूझकर धार्मिक ध्रुवीकरण के लिए किया गया है। मोइत्रा ने तंज कसते हुए कहा, "ना किसी का साथ, ना किसी का विकास, ना रहीम का, ना राम का।"

  • ग्राम सभाओं के अधिकार: कांग्रेस सांसद जय प्रकाश ने आरोप लगाया कि यह बिल ग्राम सभाओं से उनके अधिकार छीन लेगा और राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ाएगा।

सरकार का तर्क: आत्मनिर्भर गांव की ओर कदम

विरोध के बावजूद सरकार अपने फैसले पर अडिग रही। मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह बिल महात्मा गांधी के 'आत्मनिर्भर गांव' के सपने को सच करेगा। उन्होंने कहा:

"यह बिल गांवों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करेगा, उन्हें गरीबी मुक्त बनाएगा और उनकी विकास यात्रा को गति देगा।"

सरकार का मानना है कि 20 साल पुराने कानून को बदलना वक्त की मांग थी ताकि बदलते भारत की जरूरतों के हिसाब से रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें।

आम आदमी पर क्या असर होगा?

ग्रामीण मजदूरों के लिए यह बदलाव मिला-जुला हो सकता है।

  • फायदा: रोजगार के दिन 100 से बढ़कर 125 हो गए हैं, जिससे उनकी सालाना आय बढ़ सकती है।

  • चिंता: पुरानी योजना (मनरेगा) के तहत जारी जॉब कार्ड्स का क्या होगा और नई प्रक्रिया कितनी जटिल होगी, इसे लेकर अभी स्पष्टता का इंतजार है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर पुरानी व्यवस्था को अचानक बदला गया, तो करोड़ों मजदूरों को वेतन मिलने में देरी हो सकती है।

निष्कर्ष

'VB-G RAM G' बिल का पास होना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा मोड़ है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह योजना वाकई गांवों को 'विकसित' बना पाती है या फिर नाम बदलने की राजनीति तक ही सीमित रह जाती है। फिलहाल, संसद से लेकर सड़क तक इस पर बहस जारी है।