Lok Sabha Speaker Removal: स्पीकर को कैसे हटाया जा सकता है? क्या विपक्ष के पास हैं नंबर? Article 94 का पूरा गणित
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) कैसे लाया जाता है? संविधान का आर्टिकल 94 और 96 क्या कहता है? क्या विपक्ष के पास स्पीकर को हटाने के लिए जरूरी बहुमत है? आसान भाषा में समझें पूरा गणित।
नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र (Budget Session) में सियासी पारा सातवें आसमान पर है। विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए अब एक बड़ा दांव चला है—लोकसभा स्पीकर (अध्यक्ष) को उनके पद से हटाने का प्रस्ताव।
आमतौर पर अविश्वास प्रस्ताव सरकार (प्रधानमंत्री और कैबिनेट) के खिलाफ लाया जाता है, लेकिन स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाना एक बड़ी और दुर्लभ घटना है। सवाल यह है कि क्या विपक्ष वाकई स्पीकर को हटा पाएगा या यह सिर्फ एक राजनीतिक दिखावा है?
आइए समझते हैं संविधान के नियम और नंबर गेम।
1. संविधान क्या कहता है? (Article 94)
संविधान के अनुच्छेद 94 (Article 94) में स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया दी गई है। यह इतना आसान नहीं है।
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14 दिन का नोटिस: विपक्ष को प्रस्ताव लाने से कम से कम 14 दिन पहले लिखित नोटिस देना होता है।
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50 सांसदों का समर्थन: लोकसभा में इस प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करने के लिए कम से कम 50 सांसदों को अपनी सीट पर खड़े होकर इसका समर्थन करना होगा।
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कौन चलाएगा सदन? (Article 96): जब स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो, तो वह सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते। उस समय डिप्टी स्पीकर या कोई अन्य वरिष्ठ सदस्य कुर्सी संभालेगा। हालांकि, स्पीकर को अपनी सफाई देने और पहली बार में वोट डालने (First Instance Vote) का अधिकार होता है।
2. जादुई आंकड़ा: 'प्रभावी बहुमत' (Effective Majority)
स्पीकर को हटाने के लिए साधारण बहुमत नहीं, बल्कि 'प्रभावी बहुमत' (Effective Majority) की जरूरत होती है।
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इसका मतलब क्या है? सदन में उस समय मौजूद कुल सीटों (रिक्त सीटों को हटाकर) का 50% से ज्यादा।
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गणित: मान लीजिए लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं और 3 खाली हैं। तो प्रभावी संख्या 540 हुई।
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स्पीकर को हटाने के लिए 271 वोट (540 का आधा + 1) चाहिए होंगे।
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3. क्या विपक्ष के पास नंबर हैं? (The Numbers Game)
यहीं पर विपक्ष का दांव कमजोर पड़ जाता है।
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NDA (सरकार): भाजपा और उनके सहयोगियों के पास लोकसभा में 290 से ज्यादा सीटें हैं। यह बहुमत के आंकड़े (272) से काफी ऊपर है।
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I.N.D.I.A. गठबंधन (विपक्ष): विपक्ष के पास करीब 230-240 सांसद हैं।
परिणाम: आंकड़ों को देखें तो विपक्ष के पास स्पीकर को हटाने के लिए जरूरी 272+ वोट नहीं हैं। अगर वोटिंग हुई, तो प्रस्ताव का गिरना तय है।
4. फिर विपक्ष ऐसा क्यों कर रहा है?
अगर हार तय है, तो यह प्रस्ताव क्यों? इसके पीछे 3 बड़ी वजहें हैं:
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विरोध दर्ज कराना: विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर पक्षपात करते हैं, विपक्ष का माइक बंद कर देते हैं या उन्हें बोलने नहीं देते। यह प्रस्ताव इन आरोपों को आधिकारिक रूप से दर्ज कराने का तरीका है।
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बहस का मौका: अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी। विपक्ष चाहता है कि वह टीवी पर पूरे देश के सामने स्पीकर और सरकार की कथित 'तानाशाही' पर बहस करे।
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दबाव: यह भविष्य के लिए स्पीकर पर दबाव बनाने की रणनीति है।
5. इतिहास क्या कहता है?
भारत के इतिहास में आज तक किसी भी लोकसभा स्पीकर को प्रस्ताव लाकर हटाया नहीं जा सका है।
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1954 में पहले स्पीकर जी.वी. मावलंकर के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन वह गिर गया था।
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इसके बाद सोमनाथ चटर्जी जैसे स्पीकर्स के खिलाफ भी सुगबुगाहट हुई, लेकिन नंबर गेम हमेशा सरकार (Ruling Party) के पक्ष में रहा।
निष्कर्ष: विपक्ष का यह कदम 'कुर्सी' को गिराने के लिए नहीं, बल्कि 'संदेश' देने के लिए है। नंबर गेम में भले ही सरकार जीत जाए, लेकिन संसद के भीतर का संग्राम आने वाले दिनों में और तीखा होने वाला है।