Sunetra Pawar Power: अजित पवार ने खेला बड़ा दांव! पत्नी सुनेत्रा पवार बनीं पुणे और बीड की नई 'पालकमंत्री', सियासत में बड़ा कद

महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फेरबदल करते हुए राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को पुणे और बीड जिले का पालकमंत्री (Guardian Minister) नियुक्त किया है। अजित पवार के गढ़ पुणे की कमान अब उनकी पत्नी के हाथ में है। जानें इस फैसले के सियासी मायने।

Feb 4, 2026 - 18:34
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Sunetra Pawar Power: अजित पवार ने खेला बड़ा दांव! पत्नी सुनेत्रा पवार बनीं पुणे और बीड की नई 'पालकमंत्री', सियासत में बड़ा कद
महाराष्ट्र की सियासत में 'पवार पावर' का नया अध्याय: सुनेत्रा पवार को मिली पुणे और बीड की कमान, अजित पवार ने पत्नी को सौंपा अपना सबसे मजबूत किला

छत्रपति संभाजीनगर / पुणे: महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार (4 फरवरी 2026) को एक बड़ा और महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला। राज्य सरकार ने पालक मंत्रियों (Guardian Ministers) की सूची में बड़ा बदलाव करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP - अजित पवार गुट) की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) को दो सबसे महत्वपूर्ण जिलों—पुणे (Pune) और बीड (Beed)—की जिम्मेदारी सौंपी है।

यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि पुणे, जो राज्य की सांस्कृतिक और आईटी राजधानी है, लंबे समय से उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) का अभेद्य किला माना जाता रहा है। अब इस किले की चाबी उन्होंने अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को सौंप दी है।

क्या है सरकार का आदेश?

सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सुनेत्रा पवार को तत्काल प्रभाव से पुणे और बीड जिलों का पालकमंत्री नियुक्त किया गया है।

  • पुणे: अब तक पुणे के पालकमंत्री की जिम्मेदारी खुद उपमुख्यमंत्री अजित पवार संभाल रहे थे।

  • बीड: बीड जिले की जिम्मेदारी अब तक एनसीपी के ही वरिष्ठ नेता और मंत्री धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) के पास थी (हालांकि वे परभणी के भी पालकमंत्री हैं, समीकरणों में बदलाव संभव है)।

हार के बाद 'जीत' का सफर: बारामती से राज्यसभा और अब 'पालकमंत्री'

सुनेत्रा पवार की यह नियुक्ति उनके राजनीतिक करियर में एक बड़ी छलांग है।

  1. लोकसभा की हार: याद दिला दें कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामती सीट पर 'ननद-भाभी' की ऐतिहासिक लड़ाई हुई थी। उस चुनाव में सुनेत्रा पवार को अपनी ननद और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले (Supriya Sule) के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।

  2. राज्यसभा से वापसी: उस हार के बावजूद, अजित पवार ने अपनी पत्नी का राजनीतिक कद कम नहीं होने दिया। उन्हें राज्यसभा भेजा गया और अब उन्हें राज्य के सबसे महत्वपूर्ण जिले (पुणे) का प्रभारी बनाकर यह संदेश दिया गया है कि वे पार्टी में 'पावर सेंटर' हैं।

पुणे क्यों है इतना खास?

पुणे का पालकमंत्री होना महाराष्ट्र सरकार में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बाद सबसे ताकतवर पदों में से एक माना जाता है।

  • फंड पर नियंत्रण: पुणे जिला योजना समिति (DPC) का बजट हजारों करोड़ रुपये का होता है। पालकमंत्री के तौर पर सुनेत्रा पवार अब जिले के विकास कार्यों और फंड वितरण पर सीधा नियंत्रण रखेंगी।

  • अजित दादा का गढ़: पुणे जिला सहकारी बैंकों, चीनी मिलों और शिक्षण संस्थानों का केंद्र है, जहां अजित पवार की पकड़ बेहद मजबूत है। पत्नी को यह पद देकर अजित पवार ने यह सुनिश्चित किया है कि आगामी चुनावों से पहले नियंत्रण 'घर' में ही रहे।

बीड की जिम्मेदारी: कांटों का ताज?

सुनेत्रा पवार को बीड जिले का भी पालकमंत्री बनाया गया है, जो एक रणनीतिक फैसला है।

  • मराठा आरक्षण का केंद्र: बीड जिला पिछले कुछ समय से मराठा आरक्षण आंदोलन का केंद्र रहा है। मनोज जरांगे पाटिल का प्रभाव यहां सबसे ज्यादा है।

  • ओबीसी vs मराठा: बीड में ओबीसी (छगन भुजबल समर्थक) और मराठा समाज के बीच जातीय तनाव एक बड़ी चुनौती है। सुनेत्रा पवार के लिए यहां संतुलन बनाना आसान नहीं होगा।

  • राजनीतिक समीकरण: बीड में पहले से ही धनंजय मुंडे और पंकजा मुंडे जैसे दिग्गज नेता हैं। ऐसे में एक 'बाहरी' (पुणे की) नेता को यहां का पालकमंत्री बनाना पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को साधने की कोशिश हो सकती है।

विरोधियों की प्रतिक्रिया

इस नियुक्ति पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

  • शिवसेना (UBT) और एनसीपी (शरद पवार गुट): विपक्ष का कहना है कि अजित पवार "परिवारवाद" (Nepotism) को बढ़ावा दे रहे हैं। उनका आरोप है कि पुणे जैसे महत्वपूर्ण जिले की जिम्मेदारी एक "अनुभवहीन" मंत्री को देना प्रशासनिक दृष्टि से गलत है।

  • विपक्ष का यह भी कहना है कि लोकसभा में जनता द्वारा नकारे जाने के बावजूद उन्हें पिछले दरवाजे (राज्यसभा) से लाकर इतना बड़ा पद देना लोकतंत्र का अपमान है।

अजित पवार की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह अजित पवार का 'मास्टरस्ट्रोक' है।

  1. उत्तराधिकारी की तैयारी: अपने बेटे पार्थ पवार की राजनीतिक लॉन्चिंग में मिली शुरुआती असफलताओं के बाद, अजित अब सुनेत्रा पवार को एक गंभीर और प्रशासक नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

  2. महिलाओं को संदेश: सुनेत्रा पवार को आगे करके एनसीपी (अजित गुट) राज्य की महिला वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रही है, विशेषकर 'लाड़की बहिन' (Laadki Bahin) जैसी योजनाओं के बीच।

निष्कर्ष

सुनेत्रा पवार अब सिर्फ 'अजित दादा की पत्नी' नहीं रहीं, बल्कि महाराष्ट्र के प्रशासन में एक प्रमुख चेहरा बन गई हैं। पुणे और बीड जैसे भारी-भरकम जिलों का प्रभार संभालना उनके लिए अग्निपरीक्षा होगी। क्या वे प्रशासनिक चुनौतियों और मराठा आंदोलन की आग को संभाल पाएंगी? यह आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन एक बात तय है—महाराष्ट्र की राजनीति में 'पवार' परिवार का पावर गेम अभी खत्म नहीं हुआ है।