SBI Report on India-US Trade: अमेरिका के साथ व्यापार में भारत को होगा 90 अरब डॉलर का मुनाफा; निर्यात में आएगी ऐतिहासिक तेजी
एसबीआई (SBI) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-अमेरिका ट्रेड डील से देश का निर्यात रॉकेट की तरह भागेगा। अनुमान है कि अमेरिका के साथ भारत का व्यापार सरप्लस (Trade Surplus) 90 अरब डॉलर के पार पहुंच जाएगा। जानें किन सेक्टर्स की होगी चांदी।
मुंबई / नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते (Trade Deal) का असर दिखना शुरू हो गया है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की रिसर्च विंग ने बुधवार को एक रिपोर्ट जारी कर कहा है कि यह डील भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते की वजह से अमेरिका के साथ भारत का व्यापार सरप्लस (Trade Surplus)—यानी आयात के मुकाबले निर्यात का मुनाफा—अगले वित्त वर्ष (FY27) तक रिकॉर्ड 91 अरब डॉलर (करीब 7.5 लाख करोड़ रुपये) के पार पहुंच जाएगा।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष की अगुवाई में तैयार की गई इस रिपोर्ट में भारतीय निर्यातकों के लिए सुनहरे दिनों की भविष्यवाणी की गई है।
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निर्यात में उछाल: अमेरिका ने भारतीय सामानों पर से टैक्स (Import Duty) हटा लिया है। इससे भारतीय टेक्सटाइल, दवाइयां और इंजीनियरिंग गुड्स अमेरिका में सस्ते होंगे, जिससे उनकी मांग 15-20% तक बढ़ेगी।
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चीन का विकल्प: रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका अब 'चाइना प्लस वन' (China Plus One) रणनीति के तहत चीन से अपनी निर्भरता कम कर रहा है। भारत के साथ यह डील इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसका सीधा फायदा भारतीय फैक्ट्रियों को मिलेगा।
किन सेक्टर्स की होगी बल्ले-बल्ले?
एसबीआई की रिपोर्ट ने उन क्षेत्रों की पहचान की है जो इस 'जीरो ड्यूटी' (Zero Duty) का सबसे ज्यादा लाभ उठाएंगे:
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कपड़ा उद्योग (Textile): बांग्लादेश और वियतनाम से मिल रही कड़ी टक्कर अब खत्म हो जाएगी। भारतीय गारमेंट्स अब अमेरिकी बाजार में बिना टैक्स के बिकेंगे, जिससे लुधियाना और तिरुपुर जैसे शहरों में रोजगार बढ़ेगा।
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दवा उद्योग (Pharma): भारत पहले ही दुनिया की फार्मेसी है। टैक्स हटने से अमेरिकी अस्पतालों में भारतीय जेनरिक दवाओं की सप्लाई और बढ़ेगी। अनुमान है कि फार्मा निर्यात में 2-3 अरब डॉलर की बढ़ोतरी होगी।
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जेम्स एंड ज्वैलरी: सूरत के हीरा व्यापारियों के लिए यह डील किसी त्यौहार से कम नहीं है। 5.5% की ड्यूटी हटने से भारतीय ज्वैलरी की मांग में भारी उछाल आएगा।
क्या होता है ट्रेड सरप्लस?
जब कोई देश किसी दूसरे देश को सामान ज्यादा बेचता है (Export) और वहां से कम खरीदता है (Import), तो उस अंतर को 'ट्रेड सरप्लस' कहते हैं। भारत उन चुनिंदा देशों में से है जिनका अमेरिका के साथ हमेशा सरप्लस रहता है। एसबीआई का मानना है कि यह सरप्लस अब ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचने वाला है।
चुनौतियां भी हैं
हालांकि, रिपोर्ट में एक चेतावनी भी दी गई है।
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भारतीय निर्यातकों को अमेरिका के सख्त 'क्वालिटी स्टैंडर्ड्स' (Quality Standards) का पालन करना होगा।
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लॉजिस्टिक्स (परिवहन) की लागत को कम करना होगा ताकि मुनाफा और बढ़ाया जा सके।
निष्कर्ष: एसबीआई की यह रिपोर्ट बताती है कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। 90 अरब डॉलर का यह आंकड़ा सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ताकत को दर्शाता है। यह डील 'मेक इन इंडिया' को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दिलाने वाली है।